अमित शाह ने गुजरात में UCC बिल पारित होने को बताया ऐतिहासिक कदम, कहा “हर नागरिक के लिए समान कानून भाजपा का संकल्प है”

बिल के तहत हर विवाह का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा, संपत्ति बराबर बांटी जाएगी, बहुविवाह पर रोक रहेगी और लिव इन रिलेशनशिप का भी रजिस्ट्रेशन होगा। भाजपा इसे महिला सशक्तिकरण और संवैधानिक समानता की बड़ी उपलब्धि मान रही है।
Amit Shah

गुजरात विधानसभा ने मंगलवार को समान नागरिक संहिता (UCC) बिल पास कर दिया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस फैसले का सराहना की है। उन्होंने कहा कि “देश में हर नागरिक के लिए एक समान कानून हो, यह भाजपा का स्थापना से ही संकल्प रहा है। पीएम मोदी के नेतृत्व में भाजपा की राज्य सरकारें इस दिशा में निरंतर आगे बढ़ रही हैं।”

उत्तराखंड के बाद गुजरात देश का दूसरा राज्य बन गया है जिसने सभी नागरिकों के लिए विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, लिव-इन रिलेशनशिप और संपत्ति वितरण जैसे मामलों में समान कानून लागू करने का महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने विधानसभा में बिल पेश किया। लगभग साढ़े सात घंटे चली चर्चा के बाद बिल पास हो गया। हालांकि कांग्रेस ने इसके विरोध में वॉकआउट किया।

अमित शाह ने फैसले को सराहा

अमित शाह ने कहा है कि भारत में हर नागरिक के लिए समान कानून लागू करना भाजपा की स्थापना से ही संकल्प रहा है। उन्होंने मोदी सरकार के नेतृत्व में राज्य सरकारों के प्रयासों की सराहना करते हुए गुजरात को इस महत्वपूर्ण कदम पर बधाई दी और सभी विधायकों का धन्यवाद व्यक्त किया। केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि देश में तुष्टीकरण के आधार पर नहीं, बल्कि सभी नागरिकों के लिए समान कानून लागू करना प्राथमिकता और संकल्प दोनों है।

गुजरात की बीजेपी सरकार इसे महिला सशक्तिकरण और संवैधानिक समानता की बड़ी उपलब्धि मान रही है। उसका कहना है कि यह कानून सभी नागरिकों को समान अधिकार देने और पारिवारिक मामलों में स्पष्टता लाने का प्रयास है। वहीं, विपक्ष इसे धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला करार दे रहा है और बिल को राजनीतिक तौर पर चुनौतीपूर्ण बता रहा है।

बिल में होंगे ये प्रावधान

इस बिल के अनुसार वसीयत न होने पर माता-पिता, पति/पत्नी और बच्चों के बीच संपत्ति बराबर बांटी जाएगी। विवाह, उत्तराधिकार और अन्य नागरिक मामलों में भी सभी पर समान नियम लागू होंगे। वहीं हर शादी का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा। बिना रजिस्ट्रेशन विवाह अमान्य नहीं होगा लेकिन 10–25 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। पुराने विवाहों के लिए अलग रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था होगी। एक पति-एक पत्नी का नियम रहेगा और उल्लंघन पर सजा का प्रावधान होगा। वहींस लिव इन रिलेशनशिप का भी रजिस्ट्रेशन कराना होगा। तलाक, भरण-पोषण आदि के लिए समान नियम लागू होंगे। हालांकि, अनुसूचित जनजातियों पर कुछ प्रावधान लागू नहीं होंगे।

Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
Shruty Kushwaha

पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J.), 2001. 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल और लाइव इंडिया मुंबई में कार्य.

2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha →
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