
एनसीईआरटी (NCERT) की किताबों में बदलाव और इतिहास को लेकर चल रहे विवाद में अब ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी भी कूद पड़े हैं। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर सीधा हमला करते हुए कहा कि जब-जब ये सत्ता में आते हैं, इतिहास से छेड़छाड़ करते हैं। ओवैसी ने कहा- “NCERT की किताबों में सच लिखा जाना चाहिए, लेकिन सरकार तथ्यों को छुपा रही है। विभाजन और आज़ादी की लड़ाई के वास्तविक पहलुओं को दबाया जा रहा है और सिर्फ अपनी विचारधारा को प्रचारित किया जा रहा है।”
RSS पर अंग्रेजों से मिलीभगत का आरोप
ओवैसी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि आज़ादी की लड़ाई में आरएसएस का कोई योगदान नहीं था। उन्होंने आरोप लगाया कि संघ के लोग अंग्रेजों के साथ खड़े थे और आज प्रधानमंत्री उनकी तारीफ कर रहे हैं। ओवैसी ने कहा- “संघ परिवार इस देश में नफरत फैलाता है और प्रधानमंत्री उसी की तारीफ करते हैं। हिंदुत्व की विचारधारा भारत के संविधान के खिलाफ है। RSS की शपथ में केवल एक समुदाय और एक धर्म की बात होती है, जबकि संविधान सबको बराबरी देता है।” इतना ही नहीं, ओवैसी ने 1941 में बंगाल की राजनीति का उदाहरण देते हुए कहा कि “श्यामा प्रसाद मुखर्जी बंगाल कैबिनेट में मंत्री थे, जिसका नेतृत्व फ़ज़लुल हक़ कर रहे थे। फ़ज़लुल हक़ ने 1940 के मुस्लिम लीग के लाहौर अधिवेशन में पाकिस्तान प्रस्ताव रखा था। आज प्रधानमंत्री उन्हीं मुखर्जी की बात कर रहे हैं।”
प्रधानमंत्री और RSS पर सीधा हमला
NCERT विवाद से आगे बढ़ते हुए ओवैसी ने पीएम मोदी से तीखे सवाल पूछे। उन्होंने पूछा कि आरएसएस के दफ्तर पर पहली बार तिरंगा कब फहराया गया? AIMIM प्रमुख ने कहा कि आजादी के समय सच्चाई को तोड़ा-मरोड़ा जा रहा है। “कहा जा रहा है कि विभाजन में मुस्लिमों की भूमिका सबसे बड़ी थी, लेकिन हकीकत यह है कि 98 प्रतिशत मुस्लिमों ने उस समय वोट ही नहीं डाला था। यह ऐतिहासिक तथ्यों को छुपाने और एकतरफा विचारधारा थोपने की कोशिश है।” ओवैसी ने दोहराया कि उनकी पार्टी हमेशा से बीजेपी और आरएसएस की नीतियों के खिलाफ रही है और भविष्य में भी उनके खिलाफ ही रहेगी।
विदेश नीति और चुनावी रणनीति पर बयान
इतिहास और विचारधारा के मुद्दे पर हमला करने के साथ ही ओवैसी ने विदेश नीति और आर्थिक नीतियों पर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि भारत के सामने सबसे बड़ा खतरा चीन से है, लेकिन सरकार उस पर कठोर कदम उठाने से बच रही है। वहीं, अमेरिका की टैरिफ नीति ने भारत की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाया है, लेकिन प्रधानमंत्री इस पर चुप हैं। इसके अलावा, ओवैसी ने बिहार चुनाव का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी चुनाव में उतरेगी और सक्रिय रूप से प्रचार करेगी। ओवैसी ने कहा, “बिहार में हम जाएंगे और हमारी पार्टी पूरी मजबूती से चुनाव लड़ेगी।”
NCERT सिलेबस विवाद अब केवल शैक्षणिक दायरे तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह सियासी बहस का हिस्सा बन चुका है। असदुद्दीन ओवैसी का बयान इस विवाद को और तीखा कर सकता है, क्योंकि उन्होंने न सिर्फ RSS और BJP बल्कि प्रधानमंत्री मोदी को भी सीधे कटघरे में खड़ा किया है। इतिहास, विचारधारा, संविधान, विदेश नीति और चुनाव – इन सभी मुद्दों को जोड़कर ओवैसी ने सरकार के खिलाफ राजनीतिक मोर्चा खोल दिया है।
