असम विधानसभा में UCC बिल पास: बहुविवाह पर रोक से लिव-इन रजिस्ट्रेशन तक बदलेंगे कई नियम, जानें डिटेल्स

इसके तहत विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े नियम सभी धर्मों के लिए समान होंगे। कानून में बहुविवाह पर प्रतिबंध, विवाह और लिव-इन संबंधों का अनिवार्य पंजीकरण, शादी की न्यूनतम उम्र तय करने और संपत्ति अधिकारों में समानता जैसे प्रावधान शामिल किए गए हैं।
Himanta Biswa Sarma

असम विधानसभा में समान नागरिक संहिता (UCC) बिल पारित हो गया है। इसके साथ ही असम उत्तराखंड और गुजरात के बाद यूसीसी लागू करने वाला तीसरा राज्य बन गया है। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की सरकार के अनुसार नए कानून में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन संबंधों में समानता और एकरूपता लाई जाएगी।

इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे मामलों में धर्म आधारित अलग-अलग कानूनों को समाप्त कर पूर्ण समानता लाना है। अनुसूचित जनजातियों को इसके दायरे से बाहर रखा गया है, जो असम की सांस्कृतिक विविधता को ध्यान में रखते हुए किया गया है।

असम विधानसभा में समान नागरिक संहिता विधेयक पारित

असम विधानसभा ने बुधवार 27 मई को यूनिफॉर्म सिविल कोड असम 2026 विधेयक को ध्वनिमत से पास कर दिया। यह विधेयक लगभग पांच घंटे तक चली चर्चा के बाद पारित हुआ। इससे असम उत्तराखंड और गुजरात के बाद UCC लागू करने वाला देश का तीसरा राज्य बन गया है। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने इसे ऐतिहासिक कदम बताया और कहा है कि यह कानून खासकर अल्पसंख्यक समुदायों की महिलाओं को सुरक्षा, समानता और न्याय प्रदान करेगा। इस कानून के लागू होने के बाद असम में सभी धर्मों के लिए विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन संबंधों में एकसमान नियम होंगे। सरकार इसे महिलाओं के सशक्तिकरण और सामाजिक सुधार की दिशा में बड़ा कदम मान रही है।

UCC लागू होने पर असम में होंगे ये बड़े बदलाव

  • सभी धर्मों के लिए विवाह संबंधी समान नियम लागू होंगे।
  • पुरुषों के लिए शादी की न्यूनतम उम्र 21 वर्ष और महिलाओं के लिए 18 वर्ष तय की गई है।
  • बहुविवाह और द्विविवाह पूरी तरह प्रतिबंधित होंगे।
  • विवाह और तलाक का पंजीकरण 60 दिनों के भीतर कराना अनिवार्य होगा।
  • पंजीकरण नहीं कराने पर 10 हजार रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकेगा।
  • फर्जी दस्तावेज देने पर तीन महीने तक की जेल या 25 हजार रुपये तक जुर्माना हो सकता है।
  • लिव-इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन भी अनिवार्य किया गया है।
  • तलाक के मामलों में क्रूरता, परित्याग और आपसी सहमति जैसे समान आधार लागू होंगे।
  • पांच साल तक की उम्र के बच्चों की प्राथमिक कस्टडी मां को देने का प्रावधान रखा गया है।
  • उत्तराधिकार और संपत्ति बंटवारे में पति-पत्नी, बच्चों और माता-पिता को समान अधिकार देने की व्यवस्था की गई है।
Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
Shruty Kushwaha

पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J.), 2001. 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल और लाइव इंडिया मुंबई में कार्य.

2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha →
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