‘भारत को भारत की तरह देखें’, पूर्व कश्मीरी अलगाववादी नेता ने हुर्रियत को बताया अप्रासंगिक

बिलाल लोन ने कहा कि पाकिस्तान का कश्मीर पर बलपूर्वक नियंत्रण पाने का विचार बेहद हास्यास्पद है। उन्होंने कश्मीरियों से आग्रह किया कि वे अराजकता से बाहर निकलें और भविष्य की ओर बढ़ें।
‘भारत को भारत की तरह देखें’, पूर्व कश्मीरी अलगाववादी नेता ने हुर्रियत को बताया अप्रासंगिक

पूर्व अलगाववादी नेता बिलाल गनी लोन ने हुर्रियत कॉन्फ्रेंस को जम्मू-कश्मीर में गैर-कार्यशील और अप्रासंगिक करार दिया है। पीटीआई को दिए इंटरव्यू में लोन ने कहा कि 1993 में गठित यह अलगाववादी संगठन अब कश्मीर में कहीं भी मौजूद नहीं है। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे भारत को राजनीतिक दलों के दृष्टिकोण से न देखें और भारत की ताकत को स्वीकार करें, क्योंकि यह देश लड़ने के लिए बहुत बड़ी शक्ति है। लोन ने कश्मीर में अराजकता फैलाने के लिए पाकिस्तान को भी जिम्मेदार ठहराया।

बिलाल लोन ने कहा कि पाकिस्तान का कश्मीर पर बलपूर्वक नियंत्रण पाने का विचार बेहद हास्यास्पद है। उन्होंने कश्मीरियों से आग्रह किया कि वे अराजकता से बाहर निकलें और भविष्य की ओर बढ़ें। उन्होंने अलगाववादी आंदोलन की विफलताओं पर खेद जताते हुए कहा, “हुर्रियत कॉन्फ्रेंस को कई अवसर मिले लेकिन हम कहीं न कहीं चूक गए। हम अपने लोगों के लिए कुछ हासिल कर सकते थे लेकिन नहीं कर सके।”

नया रास्ता कश्मीर के विकास पर केंद्रित

राजनीति में अपने प्रवेश के बारे में बात करते हुए लोन ने कहा कि उनका नया रास्ता कश्मीर के विकास पर केंद्रित होगा। उन्होंने अपने बदलते दृष्टिकोण को हिंदी कहावत ‘देर आए दुरुस्त आए’ के साथ जोड़ा और कहा कि उन्हें केवल इस बात का अफसोस है कि वे पहले कुछ नहीं कर सके। उन्होंने जोर देकर कहा कि अब समय है कि कश्मीर के लोगों की शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं और व्यवसाय शुरू करने की संभावनाओं जैसे भविष्य पर ध्यान दिया जाए।

‘हुर्रियत कहीं नहीं है आज’

बिलाल लोन ने हुर्रियत कॉन्फ्रेंस की वर्तमान स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा, “आज की तारीख में हुर्रियत कहीं नहीं है। यह न तो कार्यशील है और न ही प्रासंगिक।” उन्होंने स्पष्ट किया कि कश्मीरियों को अब पुराने विवादों से ऊपर उठकर अपने और अपने क्षेत्र के बेहतर भविष्य के लिए काम करना चाहिए।

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