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AAP छोड़कर भाजपा में आए सांसद राघव चड्ढा को मिली बड़ी जिम्मेदारी, बने राज्यसभा याचिका समिति के अध्यक्ष

Written by:Gaurav Sharma
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राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन ने राघव चड्ढा को याचिका समिति का अध्यक्ष मनोनीत किया है, जबकि डॉ. मेनका गुरुस्वामी को भी अहम जिम्मेदारी मिली है।
AAP छोड़कर भाजपा में आए सांसद राघव चड्ढा को मिली बड़ी जिम्मेदारी, बने राज्यसभा याचिका समिति के अध्यक्ष

राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन ने उच्च सदन की महत्वपूर्ण याचिका समिति का पुनर्गठन करते हुए एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने ला दिया है, जबकि आम आदमी पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा को इस समिति का नया अध्यक्ष मनोनीत किया गया है। यह नियुक्ति तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है, जिससे राघव चड्ढा की राजनीतिक यात्रा में एक और महत्वपूर्ण पड़ाव जुड़ गया है। सभापति ने इस समिति में दस अन्य सदस्यों को भी नामांकित किया है, जो देश के विधायी कार्यों में अपनी भूमिका निभाएंगे।

राज्यसभा सचिवालय की ओर से जारी एक आधिकारिक अधिसूचना में इस महत्वपूर्ण नियुक्ति की विस्तृत पुष्टि की गई है। अधिसूचना में स्पष्ट रूप से बताया गया है कि सभापति सीपी राधाकृष्णन ने याचिका समिति का पुनर्गठन किया है, जबकि यह पुनर्गठन 20 मई से प्रभावी हो गया है। राघव चड्ढा को इस अत्यंत महत्वपूर्ण समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है, जो उनकी राजनीतिक सक्रियता और सदन में उनकी भूमिका को और अधिक प्रभावी बनाएगा। गौरतलब है कि राघव चड्ढा पिछले कुछ समय से अपनी राजनीतिक गतिविधियों को लेकर लगातार चर्चा के केंद्र में बने हुए हैं, जिससे यह नियुक्ति उनके लिए और भी अहम मानी जा रही है।

इन सांसदों को भी मिली याचिका समिति में जगह

इस दस सदस्यीय याचिका समिति में राघव चड्ढा के अतिरिक्त देश के कई अन्य प्रमुख सांसदों को भी शामिल किया गया है, जिससे समिति की कार्यप्रणाली में विविधता और अनुभव का समागम देखने को मिलेगा। इस समिति के अन्य सदस्यों में हर्ष महाजन, गुलाम अली, शंभू शरण पटेल, मयंककुमार नायक, मस्तान राव यादव बीधा, जेबी माथेर हिशाम, सुभाशीष खुंटिया, रोंगवरा नारजारी और संदोष कुमार पी के नाम प्रमुखता से शामिल हैं। यह समिति राज्यसभा में प्राप्त होने वाली विभिन्न याचिकाओं और जनहित से जुड़े गंभीर मामलों पर गहनता से विचार करती है, जबकि इसके निर्णयों का सीधा प्रभाव जनजीवन और सरकारी नीतियों पर पड़ता है।

इसके अतिरिक्त, राज्यसभा सचिवालय ने एक अन्य महत्वपूर्ण अधिसूचना जारी करते हुए यह भी जानकारी दी है कि सभापति ने 20 मई, 2026 को राज्यसभा सदस्य डा. मेनका गुरुस्वामी को भी एक बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। उन्हें कॉपोरेट कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 की संयुक्त समिति का सदस्य मनोनीत किया गया है, जबकि यह विधेयक कॉपोरेट जगत से संबंधित नियमों में सुधार लाने और उन्हें वर्तमान आर्थिक परिवेश के अनुकूल बनाने के उद्देश्य से लाया गया है। डॉ. गुरुस्वामी की यह नियुक्ति भी सदन के विधायी कार्यों में उनके योगदान को रेखांकित करती है। इन नियुक्तियों से राज्यसभा में समितियों का कार्यभार और उनकी दक्षता बढ़ने की उम्मीद है, जबकि दोनों ही नियुक्तियां सदन की कार्यप्रणाली को सुचारु बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

Gaurav Sharma
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