पश्चिम बंगाल, जो कभी अपनी उच्च शिक्षा और बौद्धिक स्तर के लिए देश-दुनिया में विख्यात था, आज विभिन्न भर्ती घोटालों के दलदल में फंसा अपनी प्रतिष्ठा बचाने को संघर्ष कर रहा है। इस गंभीर स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए राज्य के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने शनिवार को स्पष्ट शब्दों में कहा कि पिछले तृणमूल कांग्रेस शासन के दौरान हुए अनगिनत भर्ती घोटालों ने पश्चिम बंगाल की छवि को तार-तार कर दिया है और अब इस निराशाजनक स्थिति से राज्य को बाहर निकालने की सख्त आवश्यकता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं होगा।
मुख्यमंत्री अधिकारी केंद्र सरकार की ओर से आयोजित एक रोजगार मेले को संबोधित कर रहे थे, जहां उन्होंने बड़ी संख्या में युवाओं को नियुक्ति पत्र सौंपे। इस अवसर पर उन्होंने पिछली सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने बताया कि स्थिति इतनी विकट हो गई थी कि न्याय के लिए कलकत्ता उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय तक को पिछली सरकार की अवैधताओं और मनमानी अनियमितताओं में हस्तक्षेप करना पड़ा। इन घोटालों ने न केवल हजारों युवाओं के सपनों को चकनाचूर किया है, बल्कि पूरे पश्चिम बंगाल की गौरवशाली छवि को भी भारी क्षति पहुंचाई है। अधिकारी ने दृढ़तापूर्वक कहा, ‘हमें अपने प्रिय पश्चिम बंगाल को इस दलदल से बाहर निकालना ही होगा, यह हमारी नैतिक जिम्मेदारी है।’
स्कूल और नगर निकाय भर्ती घोटालों ने गिराई राज्य की साख: शुभेंदु अधिकारी
एक समय था जब पश्चिम बंगाल अपनी शैक्षिक उत्कृष्टता और प्रबुद्ध वर्ग के लिए जाना जाता था, लेकिन दुर्भाग्यवश, स्कूल नौकरियों और नगर निकाय भर्ती जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में हुए बड़े घोटालों ने राज्य की दशकों पुरानी साख को गहरा धक्का पहुंचाया है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने खुलासा किया कि इन घोटालों ने राज्य के परीक्षा केंद्रों की शुचिता को इस कदर भंग कर दिया था कि वे पूरी तरह से दागी हो चुके थे। हालात इतने बिगड़ गए थे कि पूर्वी रेलवे, दक्षिण पूर्वी रेलवे और पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे जैसी प्रतिष्ठित संस्थाओं ने भी राज्य में अपनी भर्ती परीक्षाएं आयोजित करना बंद कर दिया था। यह स्थिति किसी भी राज्य के लिए अत्यंत शर्मनाक है और सीधे तौर पर युवाओं के भविष्य पर कुठाराघात है।
मुख्यमंत्री ने राज्य के युवाओं के दर्द को साझा करते हुए बताया कि स्थानीय परीक्षा केंद्रों की विश्वसनीयता पूरी तरह से खत्म हो जाने के कारण पश्चिम बंगाल के हजारों युवाओं को अपनी किस्मत आजमाने के लिए बिहार, असम और ओडिशा जैसे पड़ोसी राज्यों में भटकने को मजबूर होना पड़ रहा था। यह उन माता-पिता के लिए अत्यंत पीड़ादायक स्थिति थी, जो अपने बच्चों के उज्ज्वल करियर का सपना देखकर उन्हें पढ़ाते-लिखाते हैं। लेकिन, टीएमसी शासन के दौरान विभिन्न सरकारी क्षेत्रों में हुई भर्ती की अनगिनत अनियमितताओं और भ्रष्टाचार ने उन माता-पिता के सपनों को पूरी तरह से चकनाचूर कर दिया। मुख्यमंत्री अधिकारी ने युवाओं को आश्वस्त किया कि वर्तमान सरकार इस स्थिति को सुधारने और उनके भविष्य को सुरक्षित करने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि राज्य की खोई हुई गरिमा को पुनः स्थापित किया जा सके और युवाओं को अपने ही राज्य में सम्मानजनक अवसर मिल सकें। यह सुनिश्चित करना हमारी प्राथमिकता है कि पश्चिम बंगाल एक बार फिर शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में अपनी पुरानी पहचान वापस पाए।






