आम जनता की जेब पर महंगाई का एक और बोझ तब आ पड़ा है, जब देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें लगातार आठवें दिन बढ़ी हैं। बीते आठ दिनों में यह तीसरी बार है जब ईंधन के दाम बढ़ाए गए हैं, जिसके बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोला है। उनकी मानें तो सरकार जनता की गाढ़ी कमाई को किस्तों में लूटने का दुस्साहस कर रही है।
खरगे का आरोप है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें भले ही रसातल में हों, मगर सरकार ने इस स्थिति का लाभ आम नागरिकों तक नहीं पहुँचाया। लोगों को राहत देने की बजाय, सरकार ने टैक्स का अतिरिक्त बोझ डालकर उनकी कमर तोड़ दी है। यह ऐसा रोग है, जो जनता की क्रय शक्ति को धीरे-धीरे खत्म कर रहा है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी बात रखते हुए मल्लिकार्जुन खरगे ने देश में नेतृत्व के संकट को उजागर किया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि जब पश्चिम एशिया में युद्ध जैसी परिस्थितियाँ बनीं और दुनिया के कई देशों ने अपने नागरिकों को ईंधन पर राहत दी, तब भारत में भाजपा सरकार लगातार पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाकर आम लोगों की जेब पर चोट कर रही थी।
किस्तों में जनता की कमाई लूट रही सरकार: खरगे
कांग्रेस अध्यक्ष ने दावा किया कि अब तो पेट्रोल कई स्थानों पर सौ रुपये प्रति लीटर के आँकड़े को पार कर चुका है। उनका कहना है कि यह किस्तों में जनता की कमाई लूटने का एक सुनियोजित प्रयास है। खरगे ने एक चौंकाने वाला आँकड़ा भी सामने रखा, जिसमें कहा गया कि केंद्र सरकार पेट्रोल-डीजल पर प्रतिदिन लगभग एक हज़ार करोड़ रुपये का कर वसूल रही है। जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें कम थीं, तब सरकार ने उसका फायदा जनता तक पहुँचाना उचित नहीं समझा।
खरगे ने सत्ताधारी दल की प्राथमिकताओं पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि जब देश संकट के दौर से गुजर रहा था, तब भाजपा नेतृत्व चुनावों में व्यस्त था। और जैसे ही चुनाव संपन्न हुए, लोगों को ‘त्याग’ का संदेश दिया जाने लगा। सिर्फ आठ दिनों के भीतर पेट्रोल-डीजल की कीमतों में तीन बार वृद्धि करना, इस ‘त्याग’ के संदेश की क्रूरता को स्पष्ट करता है।
उन्होंने कई अंतरराष्ट्रीय उदाहरण भी दिए, जिससे केंद्र सरकार की नीतियों पर और गहरा सवाल खड़ा होता है। इटली ने ईंधन पर एक्साइज ड्यूटी घटाकर अपने नागरिकों को राहत दी। ऑस्ट्रेलिया ने भी टैक्स कम कर पेट्रोल की कीमतों में लगभग सत्रह रुपये प्रति लीटर तक की कमी की। जर्मनी ने तेल पर कर घटाकर कीमतों में सत्रह से उन्नीस रुपये प्रति लीटर तक की कटौती की। ब्रिटेन ने परिवारों को सौ पाउंड की सहायता देने के साथ-साथ ईंधन और बिजली पर कर कम किए। यहाँ तक कि आयरलैंड ने भी राहत पैकेज देकर पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कटौती की।
किस्तों वाली लूट में हिस्सा किस-किस को मिल रहा है?: खरगे
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सीधा निशाना साधते हुए खरगे ने सवाल किया कि इस किस्तों वाली लूट में हिस्सा किस-किस को मिल रहा है? उन्होंने दृढ़तापूर्वक कहा कि अब देश के 140 करोड़ भारतीय यह अच्छी तरह समझ चुके हैं कि सरकार का असली संकट नेतृत्व का ही है, जो जनता के हितों की बजाय कुछ और ही प्राथमिकताएं तय कर रहा है।
दरअसल, शनिवार को एक बार फिर पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की गई। सरकारी तेल कंपनियों ने पेट्रोल के दाम में सत्तासी पैसे प्रति लीटर और डीजल में एकानवे पैसे प्रति लीटर तक का इज़ाफ़ा किया। इससे पिछले दस दिनों में ईंधन की कीमतों में कुल मिलाकर लगभग पाँच रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हो चुकी है। इससे पहले, पंद्रह मई को पेट्रोल और डीजल दोनों के दाम में तीन रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की गई थी। उसके बाद उन्नीस मई को फिर लगभग नब्बे पैसे प्रति लीटर की वृद्धि हुई। अब तीसरी बढ़ोतरी के बाद, आम लोगों पर महंगाई का दबाव और भी बढ़ने की आशंका जताई जा रही है, जो उनके मासिक बजट को और भी अधिक बिगाड़ देगा।
पेट्रोल अब हुआ ₹100 पार,
अबकी बार…
जनता की कमाई पर किश्तों में लूटमार !पेट्रोल-डीज़ल पर रोज़ाना ₹1000 करोड़ का केंद्रीय टैक्स लगाकर भाजपा का पेट नहीं भरा…
अंतर्राष्ट्रीय दाम जब कम थे तब जनता को फ़ायदा नहीं पहुँचाया, उन्हें जमकर लूटा।जब Crisis आई तो, चुनाव में जुट गए,… pic.twitter.com/EjkikgGzFK
— Mallikarjun Kharge (@kharge) May 23, 2026






