हादसा: ब्रेक फेल होने से 30 फीट खाई में गिरी बस, 8 की मौत, शीशे तोड़ बाहर जा गिरे यात्री

हादसा: ब्रेक फेल होने से 30 फीट खाई में गिरी बस, 8 की मौत, शीशे तोड़ बाहर जा गिरे यात्री

ओडिशा।
ओडिसा के गंजम जिले में आज सुबह भीषण सड़क हादसा हो गया। यहां तप्तापानी घाटी के पास स्थित पुल से एक बस नीचे गिर गई। हादसे में 8 लोगों की मौत हो गई है, जबकि 30 घायल हो गए।हादसा जब हुआ तब बस में कुल 50 से अधिक यात्री सवार थे। बताया जा रहा है कि बस का ब्रेक फेल हो जाने के कारण बस नियंत्रण खोकर पुल के नीचे गिर गई।

जानकारी के मुताबिक, बस रायगढ़ा जिले के टिकिरी से ब्रह्मपुर जा रही तभी तप्तपानी के पास पलट गई और सड़क से कम से कम 30 फुट नीचे गिर गई है।मोहाना, संखेमुंडी, डिगापहाड़ी और बेरहामपुर से लगभग 50 बचावकर्मी मौके पर भेजे गए। सभी घायलों को बेरहामपुर के अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। सूत्रों का कहना है कि कुछ यात्री अभी भी बस में फंसे हैं। बचावकर्मी गैस कटर की मदद से लोगों को निकालने में जुटे हैं। फिलहाल पूरी जांच होने के बाद ही सही कारण का पता चल सकेगा।

मृतकों के नाम
मरने वाले यात्रियों में 5 महिला, दो पुरुष एवं एक शिशु शामिल हैं। रायगड़ा की विद्युत नायक (42), पूतागड़ की झूनू बेहेरा (42), कविसूर्यनगर बालीअसरा गांव की करिश्मा नायक (25), कोदला के एल.रमेश बेहेरा (45), सुनील नायक (32), संघमित्रा महापात्र (40), अनुष्का महापात्र (12), सुबाषिनी महारणा (34) शामिल हैं।

सीएम ने किया मुआवजे का ऐलान
मुख्यमंत्री कार्यालय में एक अधिकारी ने बताया कि ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने मरने वालों के आश्रितों के लिए दो-दो लाख रुपये की अनुग्रह राशि की घोषणा की। घायलों में महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं जिन्हें ब्रह्मपुर में दिगापहंडी अस्पताल और एमकेसीजी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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