
Minimum Wage/ Living wage 2024-25 : संगठित और असंगठित क्षेत्र में काम वाले श्रमिकों-कर्मियों के लिए महत्वपूर्ण खबर है। 2025 से न्यूनतम वेतन की जगह लिविंग वेज ले सकता है। खबर है कि अगले साल से केन्द्र सरकार वेतन को लेकर नई व्यवस्था लागू करने की तैयारी में है। केंद्र सरकार देश में न्यूनतम वेतन की व्यवस्था को खत्म कर अगले साल से लिविंग वेज (Living Wage) की व्यवस्था लागू करने का प्लान बना रही है, इसके लिए अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) से तकनीकी सहायता मांगी गई है।
नई व्यवस्था लागू करने आईएलओ से मांगी है सहायता
ईटी की रिपोर्ट्स के मुताबिक, केन्द्र सरकार 2025 तक न्यूनतम वेतन को जीवनयापन वेतन से बदलने की तैयारी में है, इसके आकलन और संचालन के लिए एक रूपरेखा बनाने के लिए अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) से तकनीकी सहायता मांगी है।आईएलओ के गवर्निंग बॉडी की 14 मार्च को जिनेवा में संपन्न हुई 350वीं बैठक में न्यूनतम वेतन से जुड़े सुधारों को मंजूरी दी गई।सरकार का दावा है कि यह बुनियादी न्यूनतम वेतन से अधिक होगा।इससे एक साल में न्यूनतम वेतन से आगे ले जाया जा सकेगा।
क्या है लिविंग वेज, किस तरह मिलेगा लाभ
- ईटी की रिपोर्ट के मुताबिक, लिविंग वेज वह न्यूनतम आय होती है जिससे कोई मजदूर अपनी बुनियादी जरूरतों जैसे आवास, भोजन, स्वास्थ्य देखभाल, शिक्षा और कपड़ें को पूरा करता है। अधिकारियों की मानें तो सरकार ने क्षमता निर्माण, डेटा संग्रह और जीवनयापन मजदूरी के सकारात्मक आर्थिक प्रभावों को प्रदर्शित करने में सहायता के लिए ILO से संपर्क किया है और मदद मांगी है।
- केन्द्र सरकार 2030 तक सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स (SDG) को हासिल करने की दिशा में काम कर रही है। इससे गरीबी से बाहर निकालने के भारत के प्रयासों को गति मिल सकती है।
- श्रम सचिव सुमिता डावरा ने विकासशील देशों के लिए जीवनयापन मजदूरी को परिभाषित करने में स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर को महत्वपूर्ण कारकों के रूप में मानने के महत्व पर जोर दिया।
व्यापक जीवनयापन वेतन परिभाषा के लिए जीवन स्तर के मूल्यांकन में आर्थिक, सामाजिक और जनसांख्यिकीय तत्वों को शामिल करने पर जोर दिया।
वर्तमान में क्या है न्यूनतम वेतन को लेकर स्थिति
बता दे कि वर्तमान में भारत में 50 करोड़ वर्कर हैं और उनमें से 90% असंगठित क्षेत्र में हैं। इन्हें रोजाना कम से कम 176 रुपये या उससे अधिक मजदूरी मिलती है। राज्यों के हिसाब से यह अलग अलग भी हो सकती है।चुंकी राष्ट्रीय स्तर पर न्यूनतम वेतन में 2017 से कोई संशोधन नहीं किया गया है, हालांकि साल 2019 में पारित वेतन संहिता को अभी लागू किया जाना बाकी है। इसमें एक वेज फ्लोर का प्रस्ताव है जो सभी राज्यों पर बाध्यकारी होगा।इसके बाद मजदूरी अलग अलग होने की बजाय एक जैसी होगी। वही मिनिमम वेज की व्यवस्था के खत्म होने और लिविंग एज आने से मज़दूरी मौजूदा न्यूनतम मज़दूरी स्तर से अधिक होगी।
12 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया में.

