केंद्र सरकार ने गुरुवार को भारतीय नागरिकों को रूसी सेना में भर्ती के किसी भी प्रस्ताव से दूर रहने की कड़ी चेतावनी जारी की है। यह चेतावनी यूक्रेन युद्ध में कुछ भारतीयों को जबरन युद्ध भूमिका में धकेले जाने की खबरों के बीच आई है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि पिछले एक साल में कई बार इस तरह की कार्रवाइयों के जोखिमों और खतरों को रेखांकित किया गया है और भारतीय नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की कि इस मुद्दे को दिल्ली और मॉस्को में रूसी अधिकारियों के समक्ष उठाया गया है, जिसमें इस प्रथा को समाप्त करने और प्रभावित भारतीय नागरिकों को रिहा करने की मांग की गई है। मंत्रालय ने यह भी बताया कि वह प्रभावित भारतीयों के परिवारों के संपर्क में है। यह कदम एक प्रमुख अखबार की रिपोर्ट के बाद उठाया गया, जिसमें दावा किया गया कि दो भारतीय, जो वर्तमान में पूर्वी यूक्रेन के डोनेट्स्क क्षेत्र में हैं, को निर्माण कार्य के बहाने रूस लाया गया था, लेकिन उन्हें युद्ध के मैदान में भेज दिया गया।
पर्यटक वीजा पर रूस गए
रिपोर्ट के अनुसार, ये दोनों व्यक्ति पिछले छह महीनों में छात्र या पर्यटक वीजा पर रूस गए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि एक एजेंट ने उन्हें निर्माण क्षेत्र में नौकरी का वादा किया था, लेकिन उन्हें धोखा देकर सीधे युद्धक्षेत्र में भेज दिया गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि कम से कम 13 अन्य भारतीय भी ऐसी ही परिस्थितियों में फंसे हुए हैं। ये लोग वर्तमान में रूस द्वारा नवंबर 2024 में कब्जाए गए सेलिडोव शहर में हैं।
भर्ती के प्रस्तावों से बचने का आग्रह
विदेश मंत्रालय ने अपनी चेतावनी को दोहराते हुए भारतीय नागरिकों से किसी भी कीमत पर रूसी सेना में भर्ती के प्रस्तावों से बचने का आग्रह किया है। मंत्रालय ने कहा, “हम एक बार फिर सभी भारतीय नागरिकों से अनुरोध करते हैं कि वे रूसी सेना में शामिल होने के किसी भी प्रस्ताव से दूर रहें, क्योंकि यह रास्ता खतरों से भरा हुआ है।”






