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वाराणसी में आज अमित शाह की अध्यक्षता में मध्य क्षेत्रीय परिषद की बैठक, सीएम डॉ. मोहन यादव सहित चार राज्यों के मुख्यमंत्री होंगे शामिल

Written by:Shruty Kushwaha
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मध्य क्षेत्रीय परिषद 1956 के राज्य पुनर्गठन अधिनियम के तहत गठित कि गया था। इसका उद्देश्य राज्यों के बीच सहयोग बढ़ाना और क्षेत्रीय असमानताओं को दूर करना है। यह परिषद प्राकृतिक संसाधनों के समान उपयोग, संवेदनशील क्षेत्रों में विकास को गति देने और अंतर्राज्यीय विवादों को बातचीत के जरिए सुलझाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
वाराणसी में आज अमित शाह की अध्यक्षता में मध्य क्षेत्रीय परिषद की बैठक, सीएम डॉ. मोहन यादव सहित चार राज्यों के मुख्यमंत्री होंगे शामिल

वाराणसी में आज मध्य क्षेत्रीय परिषद की 25वीं बैठक का आयोजन हो रहा है। इस महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह करेंगे। बैठक में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय शामिल होंगे।

इसमें चारों राज्यों के मुख्य सचिव, नीति आयोग के प्रतिनिधि, अंतरराज्यीय परिषद के सदस्य और लगभग 100 से अधिक विशिष्ट प्रतिनिधि भी भाग लेंगे। ये बैठक पहली बार किसी राज्य की राजधानी से बाहर वाराणसी में आयोजित की जा रही है।

मध्य क्षेत्रीय परिषद की बैठक

वाराणसी में मंगलवार को केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में मध्य क्षेत्रीय परिषद (Central Zonal Council) की 25वीं बैठक आयोजित की गई। यह पहली बार है जब यह महत्वपूर्ण बैठक राजधानी के बाहर काशी में हो रही है। इस बैठक में मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री शामिल हो रहे हैं। यह बैठक न सिर्फ राज्यों के बीच समन्वय को मजबूत करने का अवसर प्रदान करेगी, बल्कि केंद्र सरकार के सहयोग से क्षेत्रीय विकास और सुरक्षा से संबंधित महत्वपूर्ण निर्णय लेने में भी मदद करेगी।

बैठक का एजेंडा

मध्य क्षेत्रीय परिषद की यह बैठक सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक वाराणसी के ताज होटल में आयोजित हो रही है। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय को मजबूत करना, अंतर्राज्यीय विवादों का समाधान करना और सामान्य हितों से संबंधित मुद्दों पर विचार-विमर्श करना है। चर्चा के प्रमुख बिंदुओं में शामिल हैं:

  • कानून-व्यवस्था और सुरक्षा: राज्यों में कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ करने, महिलाओं और बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों की जांच में तेजी लाने और फास्ट ट्रैक कोर्ट के कार्यान्वयन पर जोर।
  • सीमा विवाद: उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, और छत्तीसगढ़ के बीच परिवहन, पानी और संपत्ति से संबंधित अंतर्राज्यीय विवादों का समाधान।
  • विकास और बुनियादी ढांचा: प्रत्येक गांव में बैंकिंग सुविधाएं, शहरी नियोजन, बिजली, और सहकारी प्रणाली को मजबूत करना।
  • सामाजिक और पर्यावरणीय मुद्दे: पोषण, शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण से संबंधित नीतियों पर चर्चा, जिसमें ग्लोबल वार्मिंग और धार्मिक पर्यटन जैसे विषय शामिल हैं।
  • घुसपैठ और सुरक्षा: बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों के सत्यापन, भारत-नेपाल सीमावर्ती क्षेत्रों में घुसपैठ और अन्य सुरक्षा संबंधी चुनौतियों पर विचार-विमर्श।

वाराणसी प्रशासन ने इस बैठक के लिए व्यापक तैयारियां की हैं। बाबतपुर एयरपोर्ट से कालभैरव मंदिर तक के रास्तों को सजाया गया है और काशी की कला-संस्कृति को प्रदर्शित करने के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। बैठक स्थल पर काशी के 10 विशिष्ट जीआई-टैग वाले उत्पादों की प्रदर्शनी भी आयोजित की जाएगी, जो स्थानीय कारीगरों को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से लगाई जा रही है।

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Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha
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