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दवाओं की ऑनलाइन बिक्री के खिलाफ आज देशभर में बंद रहेंगे मेडिकल स्टोर, पढ़ें खबर

Written by:Banshika Sharma
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अखिल भारतीय दवा विक्रेता संगठन ने ऑनलाइन दवा बिक्री को गैरकानूनी बताते हुए 24 घंटे की देशव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है, जिससे आज यानी 20 मई को मेडिकल स्टोर बंद रहेंगे।
दवाओं की ऑनलाइन बिक्री के खिलाफ आज देशभर में बंद रहेंगे मेडिकल स्टोर, पढ़ें खबर

देश में दवाओं की ऑनलाइन बिक्री को पूरी तरह से गैरकानूनी बताते हुए अखिल भारतीय दवा विक्रेता संगठन (एआईओसीडी) ने आज 20 मई, बुधवार को एक राष्ट्रव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है। वहीं इस हड़ताल के कारण देशभर में सभी मेडिकल स्टोर 24 घंटे के लिए बंद रहेंगे, हालांकि आपातकालीन दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। संगठन ने सरकार से तत्काल प्रभाव से दवाओं की ऑनलाइन बिक्री पर रोक लगाने की मांग की है।

दरअसल एआईओसीडी ने ऑनलाइन दवा बिक्री की वैधता और इसके नियामक नियमों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। संगठन ने पूर्व में भी अपनी चिंता व्यक्त की थी और 20 मई, 2026 को 24 घंटे की राष्ट्रव्यापी दवा बिक्री हड़ताल का आह्वान किया था, जिसके क्रम में आज बुधवार को देशव्यापी बंद देखा जा रहा है। संगठन का स्पष्ट मत है कि वर्तमान में दवाओं की ऑनलाइन बिक्री पूरी तरह से गैरकानूनी है और यह मौजूदा दवा एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम 1940 और नियम 1945 के प्रावधानों का उल्लंघन करती है। एआईओसीडी ने सरकार से संबंधित अधिसूचनाओं को तत्काल रद्द करने और दवाओं की ऑनलाइन बिक्री को नियंत्रित करने के लिए एक नई, मजबूत नियामक रूपरेखा तैयार करने की मांग की है।

क्यों उठे रहे ऑनलाइन दवा बिक्री पर सवाल?

वहीं एआईओसीडी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेएस शिंदे ने इस संबंध में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि हाल ही में शुरू हुई ऑनलाइन दवा बिक्री की प्रणाली कई महत्वपूर्ण नियमों का उल्लंघन करती है। उन्होंने विशेष रूप से जीएसआर 817 अधिसूचना का उल्लेख किया, जिसे उन्होंने और संगठन ने पहले भी अनुचित करार दिया था। शिंदे के अनुसार, ऑनलाइन दवा बिक्री से दवा माफिया को बढ़ावा मिलने की आशंका है, जिससे नकली या खराब गुणवत्ता वाली दवाओं के प्रसार का खतरा बढ़ सकता है। इसके अतिरिक्त, ऑनलाइन बिक्री के प्रभावी संचालन के लिए एक मजबूत आईटी बुनियादी ढांचे की आवश्यकता होती है, जिसका वर्तमान में अभाव है। इस अभाव के कारण डेटा सुरक्षा, ग्राहक गोपनीयता और दवाओं की सटीक ट्रैकिंग पर भी गंभीर सवाल उठते हैं, जिससे उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य और सुरक्षा पर सीधा असर पड़ सकता है।

संगठन ने सरकार के समक्ष अपनी तीन मुख्य मांगें रखी हैं, जिन्हें तत्काल पूरा करने पर जोर दिया गया है:

जीएसआर 817 अधिसूचना को रद्द करना: एआईओसीडी का दृढ़ विश्वास है कि यह अधिसूचना ऑनलाइन दवा बिक्री को कानूनी वैधता प्रदान करने के लिए अपर्याप्त है और इसके प्रावधानों में कई खामियां हैं। संगठन का मानना है कि इसे तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाना चाहिए ताकि दवाओं की गुणवत्ता, सुरक्षा और वितरण की अखंडता से कोई समझौता न हो।
नई नियामक रूपरेखा का मसौदा तैयार करना: मौजूदा अधिसूचना को रद्द करने के बाद, संगठन एक ऐसी नई और व्यापक नियामक रूपरेखा के निर्माण की मांग कर रहा है, जो दवाओं की ऑनलाइन बिक्री को प्रभावी ढंग से नियंत्रित कर सके। इस रूपरेखा में फार्मासिस्टों की अनिवार्य भूमिका, दवाओं की पहचान, वितरण श्रृंखला की निगरानी, भंडारण मानकों और उपभोक्ता सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं को शामिल किया जाना चाहिए।
ऑनलाइन दवा बिक्री पर पूर्ण रोक: एआईओसीडी की सबसे महत्वपूर्ण और तात्कालिक मांग यह है कि दवाओं की ऑनलाइन बिक्री को तुरंत बंद किया जाए। यह रोक तब तक जारी रहनी चाहिए जब तक एक सुरक्षित, कानूनी रूप से मजबूत और तकनीकी रूप से सक्षम प्रणाली स्थापित नहीं हो जाती, जो दवाओं की बिक्री में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित कर सके।

जीएसआर 220 अधिसूचना को भी रद्द करने की मांग

इसके अतिरिक्त, एआईओसीडी ने जीएसआर 220 अधिसूचना को भी रद्द करने की मांग की है। यह अधिसूचना कोविड-19 महामारी के दौरान विशेष परिस्थितियों में लागू की गई थी, जब फार्मासिस्ट ही दवाइयों के एकमात्र और विश्वसनीय प्रदाता के रूप में सामने आए थे। संगठन का तर्क है कि महामारी के बाद इस अधिसूचना की अब कोई प्रासंगिकता नहीं रह गई है और इसे तत्काल वापस लिया जाना चाहिए क्योंकि यह अब अनावश्यक बाधाएं उत्पन्न कर रही है।

संगठन ने ऑनलाइन दवा प्लेटफार्मों द्वारा उपभोक्ताओं को दी जाने वाली भारी छूट पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की है। इन भारी छूटों के कारण पारंपरिक केमिस्टों को अनुचित प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है, जिससे उनका व्यवसाय बुरी तरह प्रभावित हो रहा है और उनकी वित्तीय स्थिरता पर प्रश्नचिह्न लग गया है। एआईओसीडी का कहना है कि या तो इन ऑनलाइन छूटों को बंद किया जाना चाहिए या दवा मूल्य नियंत्रण आदेश (डीपीसीओ) में संशोधन करके फार्मासिस्टों के लिए मार्जिन बढ़ाया जाना चाहिए। इससे पारंपरिक केमिस्ट भी उपभोक्ताओं को प्रतिस्पर्धी मूल्य और छूट प्रदान कर सकेंगे, जिससे बाजार में समानता बनी रहेगी और सभी हितधारकों के लिए एक समान अवसर उपलब्ध होंगे।

यह स्पष्ट किया गया है कि राष्ट्रव्यापी हड़ताल के बावजूद, मरीजों को आपातकालीन दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी। एआईओसीडी ने इस उद्देश्य के लिए अपनी सभी आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी कर ली हैं, ताकि गंभीर मरीजों और जिन्हें तत्काल दवाओं की आवश्यकता है, उन्हें किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। आंध्र प्रदेश में लगभग 43,000 मेडिकल स्टोर आज 20 मई को एक दिन के लिए बंद रहेंगे। एआईओसीडी से जुड़े आंध्र प्रदेश केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष पीवी रत्नम ने बताया कि दक्षिणी राज्य में आज इस विरोध प्रदर्शन के तहत रैलियां और अन्य जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। अखिल भारतीय दवा विक्रेता संगठन देश भर में 12.4 लाख से अधिक केमिस्टों और दवा वितरकों का प्रतिनिधित्व करता है, जिससे इसकी मांगें और यह राष्ट्रव्यापी हड़ताल एक महत्वपूर्ण प्रभाव रखती है।

Banshika Sharma
लेखक के बारे में
मेरा नाम बंशिका शर्मा है। मैं एमपी ब्रेकिंग न्यूज़ में कंटेंट राइटर के तौर पर काम करती हूँ। मुझे समाज, राजनीति और आम लोगों से जुड़ी कहानियाँ लिखना पसंद है। कोशिश रहती है कि मेरी लिखी खबरें सरल भाषा में हों, ताकि हर पाठक उन्हें आसानी से समझ सके। View all posts by Banshika Sharma
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