दिल्ली के सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को आवारा कुत्तों की संख्या गिनने और निगरानी रखने वाले मामले ने सियासी रूप ले लिया है। 30 दिसंबर 2025 को में दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बीजेपी सरकार पर जमकर निशाना साधा था। उन्होंने ट्वीट कर कहा था कि दिल्ली में सरकारी स्कूलों के शिक्षक बच्चों को पढ़ाएँगे या फिर सड़कों पर कुत्ते गिनेंगे? इसके साथ ही ये मामला सोशल मीडिया पर भी काफी वारयल हो रहा है।
हालांकि अब इस मामले में शिक्षा निदेशालय का स्पष्ट बयान सामने आ चुका है। शिक्षा निदेशालय ने कुत्तों की गिनती व निगरानी वाले दावे को पूरी तरह फर्जी और दुर्भावनापूर्ण बताया है।
सोशल मीडिया पर फैलाई गई झूठी कहानी का खंडन
दिल्ली की एजुकेशन डायरेक्टर वेदिथा रेड्डी ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर कहा कि सोशल मीडिया पर एक कहानी फैलाई गई है और उसे बढ़ाया गया है, जिसमें दावा किया गया है कि दिल्ली के सरकारी स्कूल के टीचरों को आवारा कुत्तों की गिनती करने का निर्देश दिया गया था। यह साफ तौर पर कहा जाता है कि यह दावा पूरी तरह से झूठा, मनगढ़ंत और बेबुनियाद है।
डायरेक्टरेट ऑफ एजुकेशन ने जारी नहीं किया कोई आदेश
डायरेक्टरेट ऑफ एजुकेशन ने कभी भी ऐसा कोई आदेश, निर्देश, परिपत्र या नीतिगत निर्णय जारी नहीं किया है जिसमें टीचरों को कुत्तों की गिनती करने के लिए कहा गया हो। टीचरों को सिर्फ पढ़ाई की जिम्मेदारियों के लिए रखा जाता है। यह झूठी कहानी पूरी तरह से शरारती है और सीधे तौर पर टीचरों के हौसले और इज्जत को नुकसान पहुंचाती है। इससे टीचरों और स्कूल स्टाफ में भ्रम पैदा हुआ है, पेरेंट्स और आम जनता को गुमराह किया गया है।
पुलिस में शिकायत दर्ज
उन्होंंने आगे कहा कि सोशल मीडिया पर कुछ लोगों को टीचर बनकर कुत्तों की गिनती करते देखा गया है, जो पूरी तरह से फर्जी है। इस मामले पर ऑफिशियली ध्यान दिया गया है। डिजिटल सबूत, पोस्ट और टाइमलाइन को डॉक्यूमेंट करके संभाल कर रखा गया है। दिल्ली पुलिस में एक आधिकारिक शिकायत भी फाइल की गई है। शिकायत में जानबूझकर गलत जानकारी देने, कुछ लोगों को टीचर के तौर पर इस्तेमाल करने, आपराधिक मानहानि, मिलकर बढ़ावा देने, उकसाने और सोशल मीडिया के गलत इस्तेमाल के बारे में बताया गया है। लीगल एक्शन लिया जाएगा। कानून और तथ्यों के अनुसार आगे बढ़ा जाएगा और झूठी बातों पर जिम्मेदारी हावी होगी।
मीडिया से बातचीत के दौरान डायरेक्टर ऑफ एजुकेशन ने यह भी स्पष्ट किया कि 20 नवंबर 2025 को जारी किया गया सर्कुलर केवल माननीय सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया द्वारा सुओ मोटो रिट पिटीशन (सिविल) संख्या 5 ऑफ 2025 के निर्देशों के अनुपालन में जारी किया गया था, जिसका शीर्षक था- ‘शहर आवारा कुत्तों से परेशान, बच्चे कीमत चुका रहे हैं’।
इस सर्कुलर का एकमात्र उद्देश्य विद्यालय परिसरों में छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करना था। इसके अंतर्गत सुरक्षा कर्मियों की तैनाती और प्रभावी एक्सेस कंट्रोल उपायों के माध्यम से स्कूल परिसर में आवारा कुत्तों के प्रवेश को रोकने के निर्देश दिए गए थे। इसमें शिक्षकों को किसी भी प्रकार की गणना या गैर-शैक्षणिक कार्य सौंपने का कोई निर्देश शामिल नहीं था।
#WATCH | Delhi: Sushil Singh, Director, Directorate of Information & Publicity says, “A formal complaint has been filed by the Department of Education with Delhi Police to inquire into the matter, to look into the conspiracy angle, to look at the role of individuals who have… https://t.co/hHyo8qBRBP pic.twitter.com/zm8zXh3DkR
— ANI (@ANI) January 1, 2026





