दिल्ली की गौशालाओं को सोमवार (30 मार्च 2026) को बड़ी राहत मिली है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने राजधानी की गौशालाओं के लिए लगभग 20.26 करोड़ रुपए जारी किए और उनके लीज एक्सटेंशन समझौते के प्रमाण पत्र भी सौंपे। यह कदम दिल्ली सरकार के पशु कल्याण को बेहतर करने और बेसहारा गायों की अच्छी देखभाल सुनिश्चित करने के इरादे को साफ दिखाता है। इस फैसले से उन हजारों निराश्रित गोवंश को सीधा फायदा होगा, जिनकी देखभाल इन गौशालाओं में की जाती है।

मुख्यमंत्री जन सेवा सदन में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने गौशाला संचालकों से मुलाकात की। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनकी सरकार गायों की सेवा, संरक्षण और संवर्धन के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इस मौके पर गौशालाओं में आधुनिक बायोगैस इंफ्रास्ट्रक्चर स्थापित करने के लिए भी आर्थिक सहायता वितरित की गई। इसका सीधा मकसद स्वच्छ ऊर्जा के उत्पादन को बढ़ावा देना और गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाना है, जिससे वे पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान दे सकें।

दिल्ली सरकार की पशुपालन इकाई के तहत चार प्रमुख गौशालाएं

दिल्ली सरकार की पशुपालन इकाई के तहत राजधानी की चार प्रमुख गौशालाएं आती हैं: सुल्तानपुर डबास, रेवला खानपुर, हरेवली और सुरहेड़ा। इन सभी गौशालाओं के प्रतिनिधियों को मुख्यमंत्री द्वारा चारा भुगतान, पिछले बकाये और लाइसेंस/लीज नवीनीकरण से जुड़े आदेश दिए गए। ये गौशालाएं स्थानीय निकायों द्वारा लाए गए निराश्रित गोवंश की देखरेख का अहम काम करती हैं। इनमें गायों को भोजन, रहने की सुरक्षित जगह और समय पर इलाज की व्यवस्था की जाती है। इन गौशालाओं को समय पर सहायता मिलना दिल्ली में पशु कल्याण के लिए बहुत जरूरी है।

दो हिस्सों में बांटी गई 20.26 करोड़ रुपए की राशि

जारी की गई कुल 20.26 करोड़ रुपए की राशि को दो मुख्य हिस्सों में बांटा गया है। इसमें से 7.64 करोड़ रुपए जून 2024 से मार्च 2025 तक के बकाया भुगतान के लिए हैं, जो गौशालाओं पर चल रहे पुराने कर्ज को कम करने में मदद करेगा। वहीं, 12.62 करोड़ रुपए अप्रैल 2025 से जनवरी 2026 तक के चारे के खर्च के लिए दिए गए हैं। यह अग्रिम भुगतान गौशालाओं को भविष्य के लिए वित्तीय रूप से मजबूत बनाएगा, ताकि चारे की कमी के कारण गायों को परेशानी न हो।

वित्तीय सहायता के साथ-साथ, इन चारों गौशालाओं के लंबे समय से लंबित लाइसेंस और लीज समझौते भी नवीनीकृत कर दिए गए हैं। कई बार प्रशासनिक देरी या कानूनी अड़चनों के कारण गौशालाओं को कामकाज में दिक्कतें आती हैं। लीज नवीनीकरण से उन्हें कानूनी स्थिरता मिलेगी, जिससे वे बिना किसी चिंता के गौवंश को लगातार भोजन, सुरक्षित रहने की जगह और बेहतर इलाज मुहैया करा सकेंगे। यह एक प्रशासनिक बाधा को हटाकर उनके काम को आसान बनाने वाला कदम है।

गोबर से स्वच्छ ऊर्जा: बायोगैस इंफ्रास्ट्रक्चर का दोहरा लाभ

सरकार की इस पहल का एक और दूरगामी पहलू गौशालाओं में बायोगैस इंफ्रास्ट्रक्चर स्थापित करने के लिए दी गई आर्थिक सहायता है। इसका मुख्य उद्देश्य गोबर से स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देना है। गौशालाओं से निकलने वाले गोबर का सही तरीके से निस्तारण न केवल पर्यावरण को साफ रखने में मदद करेगा, बल्कि इससे बिजली और जैविक खाद भी बनाई जा सकेगी। यह आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम है। बायोगैस संयंत्रों से प्रदूषण कम होगा और गौशालाएं अपनी ऊर्जा जरूरतों को खुद पूरा कर सकेंगी।

दिल्ली जैसे शहरी क्षेत्र में निराश्रित गोवंश का प्रबंधन हमेशा एक चुनौती रहा है। शहरीकरण और घटते चरागाहों के कारण इन पशुओं को अक्सर सड़कों पर भटकना पड़ता है, जिससे दुर्घटनाओं और बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। सरकार का यह फैसला गौशालाओं की क्षमता को मजबूत करेगा और अधिक से अधिक बेसहारा गायों को आश्रय दे पाएगा। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस बात पर जोर दिया कि पशु कल्याण उनकी सरकार की प्राथमिकता सूची में सबसे ऊपर है, और यह कदम उसी दिशा में एक ठोस पहल है।

यह योजना केवल तात्कालिक राहत नहीं है, बल्कि यह गौशालाओं को दीर्घकालिक स्थिरता और पर्यावरण के अनुकूल प्रथाओं को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करती है। स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन और कुशल अपशिष्ट प्रबंधन से गौशालाएं न केवल आर्थिक रूप से मजबूत होंगी, बल्कि शहरी पारिस्थितिकी तंत्र में एक सकारात्मक भूमिका भी निभाएंगी। दिल्ली सरकार का यह कदम पशु कल्याण के साथ-साथ सतत विकास के लक्ष्यों को भी पूरा करता है।