सीएम शिवराज का बड़ा बयान, “मोदी जी सांप नहीं देश की सांस हैं, विश्वास हैं”, कांग्रेस को कहा विषकुम्भ

सीएम शिवराज का बड़ा बयान, “मोदी जी सांप नहीं देश की सांस हैं, विश्वास हैं”, कांग्रेस को कहा विषकुम्भ

CM Shivraj Singh said Modi ji is the breath of the country, not a snake : मुख्यमंत्री शिवराज सिंह  चौहान इस समय कर्नाटक के दौरे पर हैं, वे लगातार वहां पार्टी के समर्थन में प्रचार कर रहे हैं और जनता से अपील कर रहे हैं कि यदि कर्नाटक में भाजपा की सरकार बनी तो उन्हें भी डबल इंजन वाली सरकार का फायदा मिलेगा। यहां मीडिया से बात करते हुए सीएम शिवराज ने कहा कि कांग्रेस विषकुम्भ है जबकि मोदी जी नीलकंठ हैं।

मल्लिकार्जुन खड्गे के बयान पर किया पलटवार 

एमपी के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कांग्रेस  अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड्गे द्वारा पीएम नरेन्द्र मोदी की तुलना सांप से किये जाने के सवाल का जवाब देते हुए कहा – “मोदी जी सांप नहीं, देश की सांस हैं, जनता की आस हैं, लोगों का विश्वास हैं, उन्होंने कहा कि जैसे ऑक्सीजन पूरे शरीर को जीवन भी देती है और स्फूर्ति से भर देती है वैसे ही मोदी जी ने देश को नव जीवन दिया है।

कांग्रेस को बताया विषकुम्भ

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मोदी जी एक वैभव शाली भारत, एक गौरव शाली भारत, एक समृद्ध भारत, एक शक्तिशाली भारत का निर्माण कर रहे हैं, उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस विषकुम्भ बन गई है, शिवराज ने सोनिया गांधी,  राहुल गांधी सहित अन्य कांग्रेस नेताओं द्वारा दिए गए बयान याद दिलाते हुए कहा कि कांग्रेस तो मोदी जी के बारे में जहर ही फैलाती रहती है, कहीं कहते हैं मोदी मौत के सौदागर हैं, कोई कहता है सारे मोदी चोर हैं, कोई कहता है मोदी जी सांप है कोई नीच बोलता है।

पीएम मोदी की तुलना देवाधिदेव महादेव से 

उन्होंने कहा कि ये सत्ता जाने की छटपटाहट है , मोदी जी के कारण जो सत्ता गई उसका जो दर्द और पीड़ा है वो बौखलाहट में बदल गई है, इसलिए कांग्रेस के विषकुम्भ से जहरीले बयान निकल रहे हैं, शिवराज ने मोदी की तुलना देवाधिदेव महादेव से करते हुए कहा कि मोदी जी तो जहर पीने वाले, विषपान करने वाले नीलकंठ हैं वो  देश की जनता और उसके विकास के लिए जहर पी रहे हैं।

Atul Saxena
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पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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