
केंद्र सरकार की ओर से पेश किए गए संविधान संशोधन बिल, जो प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और मंत्रियों को 30 दिनों तक जेल में रहने पर बिना दोष सिद्धि के पद से हटाने की अनुमति देता है, को लेकर संसद में हंगामा मचा हुआ है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद पी चिदंबरम ने इस कानून को असाधारण और स्पष्ट रूप से असंवैधानिक करार दिया है। उन्होंने कहा कि यह बिल जनता के मत को उलटने का प्रयास है, क्योंकि यह केवल गिरफ्तारी के आधार पर निर्वाचित नेताओं को हटा सकता है।
चिदंबरम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “अगर कोई गिरफ्तार मुख्यमंत्री 30 दिनों में जमानत नहीं पाता तो वह मुख्यमंत्री नहीं रहेगा! क्या आपने कानूनी दुनिया में इससे ज्यादा विचित्र बात सुनी है?” उन्होंने कहा कि बिना आरोप, बिना मुकदमे और बिना दोष सिद्धि के यह बिल जनता के फैसले को पलट देगा। चिदंबरम, जो एक वरिष्ठ वकील भी हैं, ने चेतावनी दी कि इस तरह का कानून निर्वाचित सरकारों को अस्थिर कर सकता है।
पीएम चिदंबरम ने क्या कहा
पीएम चिदंबरम ने कहा कि आजकल निचली अदालतें शायद ही जल्दी जमानत देती हैं और उच्च न्यायालय भी इसमें आनाकानी करते हैं। उन्होंने सवाल उठाया, “हजारों जमानत याचिकाएं हर महीने सुप्रीम कोर्ट पहुंचती हैं। इस प्रक्रिया में कई हफ्ते लग जाते हैं। इस बीच, 30 दिन बीत जाएंगे और निर्वाचित सरकार अस्थिर हो जाएगी। क्या इससे ज्यादा गैरकानूनी, असंवैधानिक, लोकतंत्र विरोधी और संघवाद विरोधी कुछ हो सकता है?”
सरकारों को अस्थिर करने का हथियार
विपक्ष ने आरोप लगाया कि यह बिल गैर-भाजपा दलों की सरकारों को अस्थिर करने का हथियार बन सकता है। उनका दावा है कि केंद्र सरकार केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग कर विपक्षी मुख्यमंत्रियों को झूठे मामलों में फंसाकर जेल भेज सकती है और फिर उन्हें पद से हटा सकती है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि इस कानून का उद्देश्य राजनीति में गिरते नैतिक मानकों को ऊपर उठाना और ईमानदारी बनाए रखना है। बिल को अब संयुक्त समिति को भेजा गया है, जिसमें लोकसभा के 21 और राज्यसभा के 10 सदस्य शामिल होंगे।
