कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने तीन नए विधेयकों की कड़ी आलोचना की है, जो प्रधानमंत्री और राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों सहित वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों को गंभीर आपराधिक आरोपों में 30 दिन तक जेल में रहने पर बर्खास्त करने की अनुमति देते हैं, भले ही उनकी सजा तय न हुई हो। इन विधेयकों को गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में पेश किया, जहां विपक्षी सांसदों ने उनके खिलाफ कागज के टुकड़े फेंके। विधेयकों को अब संयुक्त संसदीय समिति के पास जांच के लिए भेजा गया है।
राहुल गांधी ने इन विधेयकों को क्रूर और असंवैधानिक करार देते हुए कहा कि यह देश को मध्ययुगीन काल में ले जा रहा है, जहां राजा (प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जिक्र) की मर्जी से किसी को भी हटाया जा सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी इन विधेयकों का दुरुपयोग गैर-गठबंधन सरकारों को हटाने के लिए कर सकती है, जिसमें प्रवर्तन निदेशालय के जरिए झूठे मामले दर्ज कर विपक्षी मुख्यमंत्रियों को 30 दिनों के लिए जेल में डालकर उन्हें इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया जा सकता है।
धनखड़ के अचानक इस्तीफे का भी जिक्र
राहुल गांधी ने उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के अचानक इस्तीफे का भी जिक्र किया, जो पिछले महीने स्वास्थ्य कारणों से हुआ था, लेकिन सूत्रों ने बताया कि बीजेपी ने उनकी बर्खास्तगी की साजिश रची थी। उन्होंने संकेत दिया कि धनखड़ पर दबाव डाला गया और अब वह पूरी तरह चुप हैं। राहुल ने इसे संविधान पर हमला करने वालों और उसे बचाने वालों के बीच युद्ध का हिस्सा बताया, जिसके लिए उन्होंने काले टी-शर्ट पहनकर विरोध जताया।
विधेयक की हुई आलोचना
विपक्षी नेताओं, जिसमें प्रियंका गांधी वाड्रा और अभिषेक मनु सिंघवी शामिल हैं, ने भी इस विधेयक की आलोचना की है। उन्होंने आशंका जताई कि बीजेपी इसका इस्तेमाल गैर-गठबंधन सरकारों को निशाना बनाने के लिए कर सकती है। उन्होंने दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का उदाहरण दिया, जिन्हें कथित शराब नीति घोटाले में गिरफ्तार कर पांच महीने से अधिक समय तक जेल में रखा गया, बिना किसी सुनवाई के। विपक्ष का कहना है कि यह विधेयक लोकतांत्रिक रूप से चुने गए नेताओं को हटाने का एक हथियार बन सकता है।





