जनता क्यों भुगते? संसद सत्र बाधित रहने का खर्च सांसद उठाएं, एमपी ने ही रख दी मांग

पटेल ने सुझाव दिया कि सरकार को सांसदों के वेतन से इस सत्र की लागत वसूलनी चाहिए। उन्होंने कहा, "जब संसद नहीं चली तो मासूम जनता को इसका खर्च क्यों उठाना चाहिए?"
जनता क्यों भुगते? संसद सत्र बाधित रहने का खर्च सांसद उठाएं, एमपी ने ही रख दी मांग

दमन और दीव के सांसद उमेश पटेल ने संसद के मॉनसून सत्र के दौरान हुए व्यवधान के लिए सत्तारूढ़ और विपक्षी दलों को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने संसद के सामने एक बैनर के साथ प्रदर्शन किया, जिसमें लिखा था, “सत्तारूढ़ और विपक्षी दलों को माफी मांगनी चाहिए।” पटेल ने मांग की कि बाधित सत्र की भारी लागत सांसदों के वेतन से वसूली जानी चाहिए, क्योंकि यह जनता के पैसे की बर्बादी है। उन्होंने कहा कि 144 करोड़ लोगों की अपेक्षाओं को दोनों पक्षों ने निराश किया।

मॉनसून सत्र 21 जुलाई से 21 अगस्त तक चला। ऑपरेशन सिंदूर और बिहार मतदाता सूची संशोधन जैसे मुद्दों पर बार-बार स्थगन और हंगामे से प्रभावित रहा। पटेल ने इसे दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि महत्वपूर्ण विधेयकों, जैसे 600 पेज के आयकर विधेयक, पर कोई चर्चा नहीं हुई और सत्र कई बार 30 सेकंड में ही समाप्त हो गया। उन्होंने आरोप लगाया कि न तो सत्तारूढ़ दल और न ही विपक्ष सत्र चलाने के मूड में था।

सत्र की लागत वसूलने की मांग

पटेल ने सुझाव दिया कि सरकार को सांसदों के वेतन से इस सत्र की लागत वसूलनी चाहिए। उन्होंने कहा, “जब संसद नहीं चली तो मासूम जनता को इसका खर्च क्यों उठाना चाहिए?” उन्होंने दोनों पक्षों से 144 करोड़ लोगों से माफी मांगने की मांग की, क्योंकि संसद को लोकतंत्र का मंदिर बताते हुए उन्होंने इसे जनता की उम्मीदों पर खरा न उतरने वाला कृत्य बताया।

राज्यसभा ने 15 विधेयक किए पारित

हंगामे के बावजूद लोकसभा ने 12 और राज्यसभा ने 15 विधेयक पारित किए, जिनमें ऑनलाइन गेमिंग और खेल प्रशासन को नियंत्रित करने वाले कानून शामिल हैं। हालांकि, ऑपरेशन सिंदूर और तीन विवादास्पद विधेयकों, जो गंभीर आरोपों पर 30 दिनों तक गिरफ्तार प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों को हटाने का प्रावधान करते हैं, पर सत्तारूढ़ और विपक्षी दलों के बीच तीखी बहस हुई। विपक्ष ने इन विधेयकों को संघवाद और संवैधानिक सिद्धांतों के खिलाफ बताते हुए इसका विरोध किया।

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