नई दिल्ली: दिल्ली की बिजली व्यवस्था को आधुनिक बनाने और ऐतिहासिक धरोहरों को संरक्षित करने की दिशा में गुरुवार को एक बड़ा कदम उठाया गया। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने पुरानी दिल्ली के चांदनी चौक इलाके में बिजली के तारों के जंजाल को खत्म करने की महत्वाकांक्षी परियोजना समेत कई ऊर्जा परियोजनाओं का शिलान्यास किया। इन परियोजनाओं से न केवल लाखों उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली मिलेगी, बल्कि पुरानी दिल्ली की खूबसूरती भी निखरेगी।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के साथ दक्षिण दिल्ली के सांसद रामवीर सिंह बिधूड़ी और कैबिनेट मंत्री आशीष सूद भी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि दिल्ली सरकार विकास और विरासत को एक साथ लेकर चलने के लिए प्रतिबद्ध है।
चांदनी चौक: अब जमीन के नीचे होंगी 52 किलोमीटर बिजली की तारें
पुरानी दिल्ली की पहचान चांदनी चौक की 28 ऐतिहासिक सड़कों और गलियों को अब लटकते बिजली के तारों से मुक्ति मिलेगी। दिल्ली सरकार और बीवाईपीएल ने मिलकर लगभग 159.75 करोड़ रुपये की लागत से इस बड़ी परियोजना की शुरुआत की है। इसके तहत 52.5 किलोमीटर लंबी ओवरहेड बिजली लाइनों को भूमिगत किया जाएगा।
इस योजना के तहत 500 नए फीडर पिलर, सजावटी स्ट्रीट लाइट पोल लगाए जाएंगे और निगरानी के लिए आधुनिक ‘डिजिटल ट्विन’ तकनीक का इस्तेमाल होगा। यह पूरा काम रात के समय चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा, ताकि दिन में व्यापार और यातायात प्रभावित न हो। इस पहल से करीब 10,000 उपभोक्ताओं को सीधे तौर पर फायदा होगा, आग लगने का खतरा कम होगा और बिजली आपूर्ति पहले से कहीं ज्यादा भरोसेमंद बनेगी।
“चांदनी चौक केवल एक बाजार नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और व्यापारिक विरासत का जीवंत प्रतीक है। लटकते बिजली के तार इसकी सुंदरता और सुरक्षा दोनों के लिए चुनौती थे। यह परियोजना केवल बिजली व्यवस्था का सुधार नहीं, बल्कि हमारी धरोहर को सहेजने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।”- रेखा गुप्ता, मुख्यमंत्री, दिल्ली
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि शाहजहानाबाद पुनर्विकास बोर्ड की जिम्मेदारी उन्होंने स्वयं अपने पास रखी है, ताकि पुरानी दिल्ली की सड़कों, पार्किंग और अतिक्रमण जैसी समस्याओं का प्रभावी समाधान किया जा सके।
मंडोली ग्रिड और BESS प्रोजेक्ट्स से लाखों घरों को राहत
उत्तर-पूर्वी दिल्ली के लोगों को वोल्टेज की समस्या से निजात दिलाने के लिए मंडोली में 66/11 केवी जीआईएस ग्रिड सब-स्टेशन की आधारशिला रखी गई। 55.5 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह ग्रिड 18 महीनों में तैयार होगा और इससे मंडोली, हर्ष विहार, बैंक कॉलोनी समेत आसपास के लगभग 1.5 लाख उपभोक्ताओं को फायदा पहुंचेगा। राजीव गांधी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल और मंडोली जेल जैसे महत्वपूर्ण संस्थानों को भी 24 घंटे स्थिर बिजली मिलेगी।
इसके अलावा, गर्मियों में बिजली की बढ़ती मांग को देखते हुए चार नई बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (BESS) परियोजनाओं का भी शिलान्यास किया गया। शिवालिक, द्वारका (जी-5 व जी-7) और गोयला खुर्द में लगने वाली इन परियोजनाओं की कुल क्षमता 55.5 मेगावाट/111 मेगावाट-घंटा होगी।
इन बैटरी सिस्टम से लगभग 2.22 लाख उपभोक्ताओं को पीक आवर्स में बिजली कटौती से राहत मिलेगी और ग्रिड को मजबूती मिलेगी। इन सभी परियोजनाओं को मार्च 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है।
‘दिल्ली का पावर सिस्टम भविष्य के लिए तैयार’
इस अवसर पर ऊर्जा मंत्री आशीष सूद ने कहा कि यह कार्यक्रम जनता के विश्वास का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में दिल्ली के पावर सेक्टर को भविष्य की जरूरतों के लिए तैयार किया जा रहा है। उन्होंने जानकारी दी कि 436 करोड़ रुपये की योजना से चांदनी चौक समेत कई इलाकों में तार भूमिगत किए जा रहे हैं। साथ ही, डीटीएल की बैठक में 3000 करोड़ की लंबित परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है और अगले तीन वर्षों के लिए 17,000 करोड़ रुपये का बिजली ढांचा प्लान तैयार है।






