दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शुक्रवार को दिल्ली विश्वविद्यालय के आर्ट्स फैकल्टी में आयोजित ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के समर्थन में चलाए जा रहे हस्ताक्षर अभियान में भाग लिया। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने बेबाकी से कहा कि देश के प्रशासन और नीति-निर्माण के निर्णायक पदों पर महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना अब केवल एक मांग नहीं, बल्कि समय की सबसे बड़ी जरूरत है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब तक महिलाएं खुद फैसले लेने वाले अहम पदों पर नहीं पहुंचेंगी, तब तक वे समाज, परिवार और अपनी निजी जरूरतों से जुड़े मुद्दों पर प्रभावी और सही बदलाव लाने में सफल नहीं हो पाएंगी। यह भागीदारी ही सशक्तिकरण की असली कुंजी है।
मुख्यमंत्री ने दिल्ली में महिला सशक्तिकरण की दिशा में पहले से चल रही योजनाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि उनकी सरकार की ‘लखपति बिटिया’ और ‘अनमोल’ जैसी योजनाएं इसी संवेदनशील सोच का नतीजा हैं, जो महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत करने के साथ-साथ उन्हें सामाजिक सुरक्षा का कवच भी देती हैं। ये योजनाएं दिखाती हैं कि कैसे एक दूरदर्शी दृष्टिकोण महिलाओं के जीवन में बदलाव ला सकता है और उन्हें आत्मनिर्भर बना सकता है। ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ इसी कड़ी में एक बड़ा संवैधानिक कदम है, जो महिलाओं को राजनीतिक रूप से भी सशक्त करेगा, जिससे वे नीति-निर्माण में सीधे अपनी बात रख सकें।
सीएम ने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को देश के इतिहास में मील का पत्थर बताया
कार्यक्रम के दौरान पूरे परिसर में ‘अब नेतृत्व की बारी है, नारी शक्ति वंदन की जिम्मेदारी है’ और ‘सशक्त नारी, समृद्ध राष्ट्र’ जैसे संदेशों वाले पोस्टर और नारे गूंज रहे थे, जो महिला नेतृत्व और समान प्रतिनिधित्व के महत्व को साफ तौर पर रेखांकित कर रहे थे। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस ऐतिहासिक अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का तहे दिल से आभार व्यक्त किया। उन्होंने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को देश के इतिहास में एक मील का पत्थर बताया। उनके मुताबिक, यह कानून ‘बेटी बचाओ’ जैसे अभियानों से शुरू हुई यात्रा को अब ‘बेटी बढ़ाओ’ तक पहुंचाएगा, जहां बेटियों को सिर्फ बचाया ही नहीं जाएगा, बल्कि उन्हें हर क्षेत्र में आगे बढ़ने और नेतृत्व करने का पूरा मौका भी मिलेगा।
दशकों पुरानी मांग अब बनी कानून, युवाओं को जन-आंदोलन बनाने का आह्वान
मुख्यमंत्री ने इस अधिनियम की पृष्ठभूमि पर भी बात की। उन्होंने बताया कि महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व की मांग कोई नई बात नहीं है, बल्कि यह दशकों पुरानी है। इसका सफर 1931 में शुरू हुआ था, जब पहली बार इस मुद्दे पर गंभीर चर्चा हुई थी। इस लंबी और कठिन यात्रा में कई पड़ाव आए, कई बार कोशिशें हुईं, लेकिन राजनीतिक इच्छाशक्ति और आम सहमति के अभाव में यह साकार नहीं हो सका। अंततः, वर्ष 2023 में प्रधानमंत्री मोदी के मजबूत नेतृत्व में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ एक कानून का रूप ले सका। यह वास्तव में एक लंबे और अथक संघर्ष का परिणाम है। अब इस कानून का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना हम सभी नागरिकों और जनप्रतिनिधियों की सामूहिक जिम्मेदारी है, ताकि इसका पूरा लाभ समाज को मिल सके।
सीएम रेखा गुप्ता ने कार्यक्रम में मौजूद युवाओं से विशेष अपील की। उन्होंने उनसे आह्वान किया कि वे इस ऐतिहासिक पहल का सक्रिय हिस्सा बनें और महिला सशक्तिकरण के इस बड़े अभियान को केवल सरकारी प्रयास नहीं, बल्कि एक सच्चा जन-आंदोलन बनाएं। उन्होंने समझाया कि जब समाज का युवा वर्ग इस मुहिम को अपनाएगा और इसे अपनी जिम्मेदारी समझेगा, तभी महिलाएं निर्णय प्रक्रिया में बराबरी से भाग ले पाएंगी। मुख्यमंत्री ने पूरे विश्वास के साथ कहा कि जब महिलाएं हर स्तर पर निर्णय लेने में बराबरी से शामिल होंगी, तभी हमारा लोकतंत्र वास्तव में मजबूत बनेगा, सभी वर्गों का प्रतिनिधित्व करेगा और सही मायने में सशक्त हो पाएगा।
छात्र-छात्राओं शिक्षकों और नागरिकों ने लिया भाग
इस अवसर पर दिल्ली विश्वविद्यालय के बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं, शिक्षकों और शहर के जागरूक नागरिकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। सभी ने इस ऐतिहासिक पहल के प्रति अपना अटूट समर्थन दर्ज कराया और महिला सशक्तिकरण की दिशा में इस कदम की सराहना की। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित नागरिकों से एक विशेष अपील भी की गई: इस पहल के समर्थन में आगे आएं और निर्धारित नंबर 9667173333 पर एक मिस्ड कॉल देकर अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें। यह एक सरल और प्रभावी तरीका है जिसके जरिए कोई भी व्यक्ति इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय अभियान का हिस्सा बन सकता है और अपनी आवाज उठा सकता है।
हस्ताक्षर अभियान के सफलतापूर्वक संपन्न होने के बाद मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने एक अनौपचारिक कदम उठाया। वे सीधे विश्वविद्यालय परिसर में स्थित एक साधारण चाय स्टॉल पर पहुंच गईं। वहां उन्होंने छात्राओं और महिला शिक्षकों के साथ बैठकर चाय पी और उनसे सीधी बातचीत की। इस आत्मीय और सहज संवाद के दौरान मुख्यमंत्री ने सभी के विचार, अनुभव और महत्वपूर्ण सुझावों को बेहद गंभीरता से सुना। इस सीधी बातचीत के माध्यम से उन्होंने न केवल युवाओं और शिक्षकों के साथ एक सीधा और व्यक्तिगत संबंध स्थापित किया, बल्कि यह महत्वपूर्ण संदेश भी दिया कि जनप्रतिनिधि और जनता के बीच संवाद जितना सरल, सहज और खुला होगा, नीतियां उतनी ही ज्यादा प्रभावी और जनोन्मुखी बनेंगी। यह दर्शाता है कि असली नेतृत्व जमीन से जुड़कर ही काम करता है।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन के अंत में एक बार फिर विश्वास व्यक्त किया कि ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ देश में राजनीतिक प्रतिनिधित्व का एक नया और उज्ज्वल अध्याय लिखेगा। उन्होंने कहा कि यह कानून केवल महिलाओं को अधिकार नहीं देगा, बल्कि यह भारत को एक अधिक सशक्त, संतुलित और प्रगतिशील लोकतंत्र के रूप में स्थापित करेगा, जहां हर नागरिक को समान अवसर और सम्मान मिलेगा और देश की आधी आबादी अपनी पूरी क्षमता का इस्तेमाल कर सकेगी। यह एक ऐसा परिवर्तन है जो आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मजबूत नींव रखेगा।





