पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम ने हुमायूं कबीर की आम जनता उन्नयन पार्टी से गठबंधन तोड़ दिया, जिससे राज्य की सियासत में हलचल मच गई है। दरअसल दोनों पार्टियां मिलकर चुनाव की तैयारियों में जुटी थीं, लेकिन अचानक लिए गए इस फैसले ने सियासी समीकरण बदल दिए हैं। वहीं गठबंधन टूटने की मुख्य वजह आम जनता उन्नयन पार्टी के प्रमुख हुमायूं कबीर से जुड़ा एक कथित स्टिंग वीडियो बताया जा रहा है।
दरअसल इस वीडियो में हुमायूं कबीर पर बीजेपी के साथ एक हजार करोड़ रुपये की डील करने का आरोप लगाया गया है। यह कथित स्टिंग वीडियो तृणमूल कांग्रेस ने जारी किया था, जिसके बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में घमासान मच गया।
एआईएमआईएम ने गठबंधन तोड़ने का फैसला लिया
वहीं कबीर पर लगे आरोपों के बाद ओवैसी की पार्टी ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उनके साथ गठबंधन तोड़ने का फैसला लिया। एआईएमआईएम ने पश्चिम बंगाल में अब अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान किया है। इस कदम से यह साफ हो गया है कि पार्टी अपनी छवि को लेकर सतर्क है और आरोपों को गंभीरता से लिया गया है। इस सियासी घटनाक्रम पर महाराष्ट्र में शिवसेना (उद्धव गुट) के नेता संजय राउत ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। राउत ने असदुद्दीन ओवैसी को बैरिस्टर बताते हुए उन्हें संयम रखने की सलाह दी। उनका कहना है कि विपक्षी दलों को ऐसे कदम नहीं उठाने चाहिए जिनसे बीजेपी को फायदा मिले।
जानिए संजय राउत ने क्या कहा?
संजय राउत ने कहा कि बीजेपी को फायदा पहुंचाने के लिए इस तरह के राजनीतिक हथकंडे नहीं अपनाए जाने चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि ओवैसी को विपक्षी दलों के साथ बातचीत करनी चाहिए। राउत ने साफ कहा कि असली दुश्मन बीजेपी है और देश की दुश्मन भी बीजेपी ही है। राउत ने आगे कहा कि अगर कोई खुद को राष्ट्रभक्त मानता है तो उसे ऐसा कोई राजनीतिक कदम नहीं उठाना चाहिए जिससे बीजेपी को मदद मिले। चाहे वे असदुद्दीन ओवैसी हों या कोई और नेता, सभी को इस बात का ध्यान रखना चाहिए।
गौरतलब है कि एआईएमआईएम और आम जनता उन्नयन पार्टी ने पहले आधिकारिक तौर पर गठबंधन का ऐलान किया था। इसके बाद दोनों दल मिलकर पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुट गए थे। उस समय इसे राज्य में तीसरा मोर्चा बनाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा था।
गठबंधन की घोषणा के समय हुमायूं कबीर ने कहा था कि यह गठबंधन कभी नहीं टूटेगा। उन्होंने असदुद्दीन ओवैसी को अपना भाई बताते हुए कहा था कि जब तक वे जिंदा हैं, उनकी पार्टी एआईएमआईएम के साथ रहेगी। उन्होंने यह भी कहा था कि वे ओवैसी को अपने अभिभावक और बड़े भाई की तरह मानते हैं। उस समय दोनों दलों ने भविष्य में लोकसभा चुनाव भी साथ लड़ने की बात कही थी।






