पटना के सियासी गलियारों में इन दिनों एक सरकारी आवास को लेकर खूब चर्चा गरम है। बात सिर्फ एक बंगले की नहीं, बल्कि सत्ता के समीकरणों और राजनीतिक दबदबे की है। जिस तरह पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने पटना एयरपोर्ट पर मीडिया के सामने अपनी बात रखी, उसने बिहार की नई सरकार की पेशानी पर बल डाल दिए हैं। उनकी दो टूक बात, ‘हम तो चाहते हैं कि सरकार फोर्स बुलाकर खाली करा ले, लेकिन हम अपनी जगह से टस से मस नहीं होने वाले’, यह सिर्फ एक बयान नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार को सीधी चुनौती मानी जा रही है।
अंदरखाने की खबर यह है कि सरकार ने पूर्व नेता प्रतिपक्ष राबड़ी देवी को सर्कुलर रोड स्थित आवास संख्या-10 खाली करने का निर्देश दिया था। यह निर्देश ऐसे समय में आया है जब नई सरकार अपने बूते पर अपनी पकड़ मजबूत करने में जुटी है। भवन निर्माण विभाग के अधिकारी अब समझ नहीं पा रहे कि इस पेचीदा मसले का हल कैसे निकाला जाए। समस्या सुन ली गई है और उसका वजन भी तय हो गया है, लेकिन अब ‘चाय पर बुलावा’ किसे आएगा, यह देखना बाकी है।
मंत्री नंदकिशोर राम को आवंटित हो चुका है यह आवास
नियम-कायदों की बात करें तो विभाग ने 25 नवंबर 2025 को ही नेता प्रतिपक्ष के लिए हार्डिंग रोड स्थित आवास संख्या-39 आवंटित कर दिया था। यह एक सामान्य प्रक्रिया है, जिसमें पद के अनुसार आवास का आवंटन होता है। लेकिन बात सिर्फ आवंटन की नहीं है। विभाग की फाइलों में दर्ज है कि नया आवास उपलब्ध होने के बावजूद राबड़ी देवी ने अब तक सर्कुलर रोड स्थित आवास संख्या-10 खाली नहीं किया है। और तो और, इस आवास को 27 मई 2026 को डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के मंत्री नंदकिशोर राम को आवंटित भी किया जा चुका है। अब सवाल यह है कि मंत्री नंदकिशोर राम कहां रहेंगे? उनका आवास तो राबड़ी देवी के कब्जे में है। यह मामला सिर्फ कागजी नहीं, बल्कि एक मंत्री के लिए आवास की उपलब्धता से भी जुड़ा है।
सरकारी आवास खाली करने का मिला नोटिस
विभागीय पत्र में यह भी साफ-साफ उल्लेख किया गया है कि नए आवंटन को प्रभावी बनाने के लिए आवास संख्या-10 को शीघ्र खाली कराना आवश्यक है। संयुक्त सचिव-सह-भू-संपदा पदाधिकारी की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि इस प्रस्ताव को सक्षम प्राधिकार की स्वीकृति मिल चुकी है। विभाग ने नेता प्रतिपक्ष राबड़ी देवी से अनुरोध किया है कि आवास खाली कराने की कार्रवाई जल्द सुनिश्चित की जाए। यह एक तरह से सरकार का अंतिम आग्रह है, जिसके बाद प्रशासन के पास सख्ती बरतने के अलावा कोई और रास्ता नहीं बचता।
यह वही आवास है, जहां लालू प्रसाद अपने पूरे परिवार के साथ फिलहाल रह रहे हैं। ऐसे में यह सिर्फ राबड़ी देवी का मामला नहीं, बल्कि लालू परिवार के दबदबे और सियासी शक्ति प्रदर्शन का भी सवाल बन गया है। राबड़ी देवी का ‘फोर्स बुला लो’ वाला बयान उनकी इस जिद्द और आत्मबल को दर्शाता है कि वे इतनी आसानी से अपनी जगह छोड़ने वाली नहीं हैं। यह एक उपनिरीक्षक की परेशानी से कहीं बढ़कर है, जहां एक पूर्व मुख्यमंत्री और मौजूदा सरकार आमने-सामने खड़ी हैं।
अब देखना यह होगा कि सरकार इस सियासी चुनौती से कैसे निपटती है। क्या वाकई प्रशासन और फोर्स का इस्तेमाल होगा, जैसा कि राबड़ी देवी ने चुनौती दी है, या फिर कोई बीच का रास्ता निकाला जाएगा? क्या आला अधिकारी इस मामले में कोई ऐसा रास्ता निकालेंगे जिससे बिना टकराव के बात बन जाए? पटना की राजनीति में एक सरकारी आवास ने फिर से हलचल मचा दी है, और सबकी निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि इस टकराव का अगला अध्याय क्या होगा और कौन झुकता है।






