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हिरासत में मौत का मामला, पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर हाई कोर्ट में याचिका दायर, राज्य सरकार और अधिकारियों को नोटिस जारी

Reported by:Sandeep Kumar|Edited by:Atul Saxena
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याचिकाकर्ता ने सवाल उठाया है कि पुलिस कस्टडी और हवालात जैसी सुरक्षित जगहों पर आरोपियों तक जहर या फांसी लगाने के साधन आखिर पहुंचे कैसे ?
हिरासत में मौत का मामला, पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर हाई कोर्ट में याचिका दायर, राज्य सरकार और अधिकारियों को नोटिस जारी

Jabalpur HC

छतरपुर जिले के खजुराहो निवासी पीयूष दीक्षित ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में याचिका दायर करते हुए पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किये हैं। याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि जिले में दो माह के अंदर पुलिस की हिरासत में चार लोगों की संदिग्ध मौत हुई है। मामले पर कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए राज्य सरकार सहित पुलिस अधिकारियों को नोटिस जारी करते हुए चार सप्ताह में जवाब मांगा है। अदालत ने यह भी निर्देश दिए है कि मौतों से संबंधित सभी थानों के सीसीटीवी फुटेज को सुरक्षित रखा जाए।

शुक्रवार को हाई कोर्ट की वेकेशन बेंच जस्टिस विवेक जैन और अजय कुमार निरंकारी ने जनहित याचिका पर सुनवाई की। खजुराहो निवासी समाजसेवी पीयूष दीक्षित की और से दायर जनहित याचिका में आरोप लगाया गया है कि छतरपुर जिले के विभिन्न थानों में महज दो माह के भीतर चार युवकों की पुलिस हिरासत में मौत हुई है। याचिका में इन मौतों को संदिग्ध बताते हुए पुलिस पर थर्ड डिग्री टॉर्चर के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। याचिकाकर्ता ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो( सीबीआई) से कराने, एंव दोषी पुलिस अधिकारी-कर्मचारियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज करने तथा सीसीटीवी फुटेज और कॉल डिटेल रिकॉर्ड तत्काल जब्त करने की मांग की है।

वकीलों ने रखीं दलील 

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता केसी घिल्डियाल और अधिवक्ता जितेंद्र कुमार दीक्षित ने पक्ष रखा। वहीं राज्य सरकार की ओर से उप महाधिवक्ता स्वप्निल गांगुली मौजूद रहे, जिन्होंने कोर्ट के समक्ष दलील देते हुए कहा कि चार में से दो मामलों में न्यायिक जांच के आदेश पहले ही जारी किए जा चुके हैं।

राज्य सरकार, डीजीपी सहित अन्य अधिकारियों को नोटिस 

हाई कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार, डीजीपी, आईजी सागर रेंज, छतरपुर पुलिस अधीक्षक तथा राजनगर, चांदला और गौरीहार थाना प्रभारियों को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। अदालत ने चारों मामलों से जुड़े संबंधित थानों के सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने का निर्देश दिया है, ताकि जांच के दौरान महत्वपूर्ण साक्ष्य नष्ट न हो सकें।

सभी मौत में पुलिस का एक ही जवाब: याचिकाकर्ता  

याचिकाकर्ता का कहना है कि थानों में हुई मौत को लेकर सबसे बड़ा सवाल यह भी उठ रहा है कि चारों मामलों में पुलिस ने समान जवाब दिया कि आरोपियों ने आत्महत्या कर ली, या जहर खा लिया। याचिकाकर्ता ने सवाल उठाया है कि पुलिस कस्टडी और हवालात जैसी सुरक्षित जगहों पर आरोपियों तक जहर या फांसी लगाने के साधन आखिर पहुंचे कैसे ? याचिका में यह भी दावा किया गया है कि मृतकों के शरीर पर चोटों के निशान पाए गए, जो कथित तौर पर हिरासत में यातना दिए जाने की आशंका को मजबूत करते हैं।

Atul Saxena
लेखक के बारे में
पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena
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