दिल्ली आबकारी नीति मामला: अरविंद केजरीवाल को लगा बड़ा झटका, हाईकोर्ट ने खारिज की जज बदलने वाली याचिका

दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को आबकारी नीति मामले में राहत नहीं मिली है। हाईकोर्ट ने उनकी जज बदलने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है। जस्टिस स्वर्ण कांत ने कहा कि मैं ही बिना किसी भय या पक्षपात के इस मामले का निर्णय करूंगीं।
Arvind Kejriwal

दिल्ली आबकारी नीति मामले में दिल्ली हाईकोर्ट से पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल को बड़ा झटका लगा है। केजरीवाल की जज बदलने वाली मांग की अर्जी को जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने फैसला सुनाते हुए खारिज कर दिया है। इतना ही नहीं हाईकोर्ट ने अरविंद केजरीवाल समेत अन्य आरोपियों की अर्जी को भी खारिज कर दिया है। सोमवार को इस मामले को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई हुई थी।

सुनवाई करते हुए जस्टिस स्वर्ण कांता ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उनकी शपथ संविधान के प्रति है। उन्होंने कहा कि उनकी शपथ उन्हें यही सिखाती है कि न्याय किसी भी दबाव में आकर नहीं किया जा सकता। इसलिए मैं इन आवेदनों को अस्वीकार करती हूं और मैं बिना किसी भय या पक्षपात के इस मामले का निर्णय करूंगीं।

क्या है पूरा मामला?

बता दें कि आबकारी नीति मामले से जुड़ी सुनवाई के दौरान केजरीवाल ने दिल्ली हाईकोर्ट आबकारी नीति मामला में एक याचिका दाखिल की थी, जिसमें उन्होंने जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा से मामले से खुद को अलग करने का अनुरोध किया था। सोमवार, 20 अप्रैल 2026 को इस याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुनाया। अदालत ने अरविंद केजरीवाल की याचिका को खारिज कर दिया।

फैसला सुनाए जाने से पहले जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने याचिकाकर्ताओं की ओर से लगाए गए आरोपों पर भी विस्तृत प्रतिक्रिया दी और स्पष्ट किया कि मामले की सुनवाई पूरी निष्पक्षता के साथ की जा रही है। इस निर्णय के साथ ही अदालत ने संकेत दिया कि मामले की सुनवाई तय प्रक्रिया के अनुसार आगे जारी रहेगी।

केजरीवाल मामले में दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा का बयान

केजरीवाल की जज को हटाने की मांग वाली याचिका खारिज होने के बाद बयानबाजी भी जमकर हो रही है। इस मामले में दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा का बयान भी सामने आया है। वीरेंद्र सचदेवा ने कहा कि अरविंद केजरीवाल की दिक्कत यह है कि वह अपने बहुत चालाकी से हदें पार कर देते हैं। उन्हें समझना चाहिए कि कोर्ट इंसाफ का मंदिर है, कोई राजनीतिक अखाड़ा नहीं। केजरीवाल ने जो नैरेटिव बनाने की कोशिश की और व्यक्तिगत टिप्पणियां की, वह संवैधानिक गरिमा का उल्लंघन था।

Shyam Dwivedi
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