दिल्ली में सर्दियों के प्रदूषण से निपटने के लिए विंटर एंटी पॉल्यूशन प्लान, पार्किंग शुल्क दोगुना करने की तैयारी

इस योजना के तहत ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान के साथ मिलकर प्रदूषण नियंत्रण के सख्त कदम उठाए जाएंगे। दिल्ली सरकार निजी वाहनों के उपयोग को कम करने के लिए पार्किंग शुल्क दोगुना करने, पॉल्यूशन सर्टिफिकेट अनिवार्य करने और पुराने वाहनों पर रोक जैसे उपाय लागू करने की तैयारी में है।
Delhi Pollution

फाइल फोटो

दिल्ली में हर साल सर्दियों के दौरान बढ़ने वाले वायु प्रदूषण से निपटने के लिए सरकार ने अभी से व्यापक तैयारी शुरू कर दी है। इसी कड़ी में दिल्ली सरकार ने “विंटर एंटी पॉल्यूशन प्लान” का ऐलान किया है जो हर साल 1 नवंबर से 28 फरवरी तक लागू रहेगा। इस योजना का उद्देश्य सर्दियों में स्मॉग और खतरनाक वायु गुणवत्ता स्तर को नियंत्रित करना है।

सरकार ने साफ किया है कि यह योजना पहले से लागू ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के साथ मिलकर काम करेगी, ताकि प्रदूषण के स्तर के हिसाब से तुरंत सख्त कदम उठाए जा सकें। दिल्ली का यह विंटर एंटी पॉल्यूशन प्लान एक व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसमें यातायात नियंत्रण, वाहन उत्सर्जन पर सख्ती और सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने जैसे उपाय शामिल हैं।

पार्किंग शुल्क दोगुना करने का प्रस्ताव

इस योजना के तहत सबसे अहम कदमों में से एक निजी वाहनों के उपयोग को कम करना है। इसके लिए पार्किंग शुल्क को दोगुना करने का प्रस्ताव रखा गया है। सरकार का मानना है कि इससे लोग निजी वाहनों की बजाय मेट्रो, बस और अन्य सार्वजनिक परिवहन साधनों का अधिक उपयोग करेंगे जिससे सड़क पर ट्रैफिक और प्रदूषण दोनों में कमी आएगी। नई व्यवस्था के अनुसार यदि किसी वाहन के पास वैध पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल (PUC) सर्टिफिकेट नहीं होगा तो उसे दिल्ली के पेट्रोल पंपों पर ईंधन नहीं मिलेगा। यह नियम पुराने या बिना जांच वाले वाहनों पर रोक लगाने के लिए लागू किया जाएगा।

बाहरी कमर्शियल वाहनों पर रोक 

विंटर प्लान में यह भी प्रावधान किया गया है कि दिल्ली के बाहर से आने वाली गैर-बीएस-6 (Non-BS6) कमर्शियल गाड़ियों को राजधानी में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी। हालांकि सीएनजी, इलेक्ट्रिक, आपातकालीन सेवाओं और सरकारी वाहनों को इस नियम से छूट दी जाएगी। दिल्ली सरकार का कहना है कि इन कदमों का मकसद सर्दियों में होने वाले गंभीर प्रदूषण स्तर को नियंत्रित करना और नागरिकों को स्वच्छ हवा उपलब्ध कराना है। अधिकारियों के अनुसार, यह कदम धीरे-धीरे ट्रैफिक कम करने और स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा देने की दिशा में अहम भूमिका निभाएगा।

दरअसल दिल्ली एनसीआर हर साल अक्टूबर-नवंबर से फरवरी तक भयंकर वायु प्रदूषण की चपेट में आ जाता है। इस दौरान AQI अक्सर 400 से 900 के बीच पहुंच जाता है जो ‘गंभीर’ से ‘खतरनाक’ श्रेणी में आता है। इसके मुख्य कारणों में पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में धान की पराली जलाना शामिल है। इसके अलावा वाहनों का धुआं, निर्माण स्थलों की धूल, औद्योगिक उत्सर्जन, त्योहारों में पटाखे और कचरा जलाना भी प्रदूषण को बढ़ाते हैं। ट्रैफिक जाम के कारण निजी वाहनों का अत्यधिक उपयोग उत्सर्जन को और बढ़ा देता है।

Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
Shruty Kushwaha

पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J.), 2001. 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल और लाइव इंडिया मुंबई में कार्य.

2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha →
Follow Us :GoogleNews