
AAP नेता सौरभ भारद्वाज
आम आदमी पार्टी (AAP) के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने नालों की डिसिल्टिंग (सफाई) में हुए करोड़ों रुपये के कथित भ्रष्टाचार को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि दिल्ली की बीजेपी सरकार अब इस घोटाले को छिपाने के लिए उससे जुड़े दस्तावेज़ और रिकॉर्ड को नष्ट कर रही है। रविवार (10 अगस्त) को पार्टी मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में भारद्वाज ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद नालों की सफाई की थर्ड पार्टी ऑडिट नहीं कराई गई। उनका कहना है कि उन्होंने 13 जून 2024 को तत्कालीन मुख्य सचिव नरेश कुमार को लिखित आदेश भेजा था कि इस काम की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जाए, लेकिन इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
आरटीआई से निकला ‘चौंकाने वाला सच’
सौरभ भारद्वाज के अनुसार, उन्होंने हाल ही में अपने नाम से आरटीआई दाखिल की, जिसमें पूछा गया था कि उनके पत्र पर क्या कार्रवाई हुई और थर्ड पार्टी ऑडिट का क्या नतीजा निकला। 29 जुलाई 2025 को मुख्य सचिव कार्यालय से आए जवाब में कहा गया कि 13 जून 2024 का संदर्भित पत्र उनके पास कभी प्राप्त ही नहीं हुआ। भारद्वाज का आरोप है कि यह सरकारी रिकॉर्ड नष्ट करने और सबूत मिटाने का मामला है। उन्होंने कहा, “जब मैंने पत्र भेजा था, तब प्रेस कॉन्फ्रेंस करके मीडिया को इसकी जानकारी दी थी। इसके बाद 14 जून को गृह मंत्रालय को भी शिकायत भेजी थी। अब बीजेपी सरकार कह रही है कि पत्र मिला ही नहीं, जबकि इसकी कॉपी सोशल मीडिया और पत्रकारों के पास मौजूद है।”
जलभराव से जनहानि और नाराजगी
भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच भारद्वाज ने राजधानी में बारिश के बाद होने वाले जलभराव को भी मुद्दा बनाया। उन्होंने बताया कि रक्षा बंधन के दिन दिल्ली की कई सड़कें डूब गईं। कनॉट प्लेस जैसी जगहों पर पानी भर गया, जिससे लोग घंटों फंसे रहे। उनके अनुसार, जलभराव के कारण सात लोगों की दीवार गिरने से मौत हो गई, इनमें दो बच्चे, दो महिलाएं और तीन पुरुष शामिल थे। इसके अलावा, एक ढाई साल का बच्चा अपने घर के बाहर खुले सीवर में गिरकर डूब गया। उन्होंने कहा, “डिसिल्टिंग पर करोड़ों रुपये खर्च हुए, फिर भी बारिश में दिल्ली डूब रही है। क्या यह सबूत नहीं है कि भ्रष्टाचार हुआ है?”
राजनीतिक और कानूनी टकराव
सौरभ भारद्वाज का कहना है कि उन्होंने यह मुद्दा न केवल मुख्य सचिव बल्कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय तक पहुंचाया, लेकिन कहीं से भी कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी सरकार, एलजी और पुराने मुख्य सचिव नरेश कुमार सभी मिलकर इस मामले में चुप्पी साधे हुए हैं। AAP नेता ने कहा, “यह सीधे-सीधे भ्रष्टाचार को बचाने और सबूत मिटाने का प्रयास है। हम आरटीआई के सभी दस्तावेज़ सार्वजनिक करेंगे और जनता के सामने सच रखेंगे।” भारद्वाज का यह भी कहना है कि यह मामला केवल भ्रष्टाचार का नहीं, बल्कि सरकारी रिकॉर्ड के साथ छेड़छाड़ और कानून के उल्लंघन का है।
सौरभ ने छेड़ी नई बहस
सौरभ भारद्वाज के आरोप ने दिल्ली की सियासत में एक नई बहस छेड़ दी है। अब सवाल यह है कि क्या हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद डिसिल्टिंग की थर्ड पार्टी ऑडिट न कराना और संबंधित दस्तावेज़ों का ‘गायब हो जाना’ महज़ एक संयोग है या वास्तव में भ्रष्टाचार को छिपाने की सुनियोजित कोशिश। बीजेपी और दिल्ली सरकार की ओर से इस मामले पर अभी तक कोई सीधा जवाब नहीं आया है।
