‘लाखों कमाने वाली पत्नी को भी चाहिए गुजारा भत्ता’? दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला, पति को दिया ये आदेश!

‘लाखों कमाने वाली पत्नी को भी चाहिए गुजारा भत्ता’? दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला, पति को दिया ये आदेश!

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाते हुए कहा है कि पत्नी की अच्छी आय होने पर भी उसे भरण-पोषण से वंचित नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने साफ किया कि यदि पत्नी की कमाई वैवाहिक जीवन में मिलने वाले जीवन स्तर को बनाए रखने के लिए पर्याप्त नहीं है, तो पति को अतिरिक्त आर्थिक मदद देनी होगी। यह फैसला जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रेनू भटनागर की बेंच ने सुनाया। कोर्ट ने कहा कि भरण-पोषण का उद्देश्य सिर्फ पत्नी को भूखा न रहने देना नहीं, बल्कि दोनों को समान जीवन स्तर प्रदान करना है।

 शादी, बच्ची और आय में बड़ा अंतर

दरअसल, यह मामला एक ऐसे दंपति से जुड़ा है जिनकी शादी 22 नवंबर 2013 को हुई थी। अगस्त 2016 में उनकी बेटी हुई। अक्टूबर 2019 से दोनों अलग रह रहे हैं। बच्ची की कस्टडी मां के पास है। पत्नी दिल्ली विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं और उन्हें करीब 1.25 लाख रुपए मासिक वेतन मिलता है। वहीं, पति एडोबी सिस्टम्स में सीनियर कंप्यूटर साइंटिस्ट हैं, जिनकी सालाना आय 1 करोड़ रुपये से अधिक है। कोर्ट ने माना कि इतने बड़े आर्थिक अंतर में पत्नी और बच्ची को उचित जीवन स्तर देना जरूरी है।

फैमिली कोर्ट से हाईकोर्ट तक – पत्नी की चुनौती

फैमिली कोर्ट ने पति को केवल बच्ची के लिए 35 हजार रुपए मासिक भरण-पोषण और स्कूल खर्च देने का आदेश दिया था। पत्नी के लिए भरण-पोषण से इनकार कर दिया गया था। पत्नी ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी। पति ने दलील दी कि पत्नी आत्मनिर्भर हैं इसलिए उन्हें मदद की जरूरत नहीं। पत्नी ने कहा कि बच्ची की परवरिश, शिक्षा और जीवनशैली का खर्च नजरअंदाज किया गया। हाईकोर्ट ने कहा कि भरण-पोषण से वंचित करना नाइंसाफी है, क्योंकि वैवाहिक जीवन टूटने के बाद भी आर्थिक मदद जरूरी है।

हाईकोर्ट का फैसला – भरण-पोषण बढ़ाकर डेढ़ लाख

दिल्ली हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के आदेश पर रोक लगाते हुए कहा कि पत्नी की आय होने के बावजूद उन्हें आर्थिक मदद मिलनी चाहिए। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए बताया कि धारा 24 का मकसद आर्थिक कठिनाई से बचाना है। कोर्ट ने पति की करोड़ों की आमदनी, महंगे शेयर और स्टॉक विकल्प जैसी सुविधाओं तथा पत्नी की तुलनात्मक कमाई को देखते हुए भरण-पोषण की राशि बढ़ाकर 35 हजार से 1.5 लाख रुपए कर दी। यह राशि पत्नी और बच्ची दोनों के लिए संयुक्त रूप से दी जाएगी।

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