होली पर दिल्ली की हवा हुई साफ, PM2.5 स्तर में 34% की गिरावट, सांसद अजय माकन ने DPCC डेटा से समझाया

होली के दिन दिल्ली में वाहनों की आवाजाही घटने और निर्माण गतिविधियां रुकने के बीच PM2.5 स्तर में तेज गिरावट दर्ज हुई। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद अजय माकन ने DPCC के 17 मॉनिटरिंग स्टेशनों के घंटावार आंकड़ों के आधार पर दावा किया कि शहर का औसत PM2.5 अधिकतम 134 से 89 µg/m³ पर आया। उन्होंने इसे नीति-स्तर पर लागू करने की जरूरत बताते हुए परिवहन और निर्माण धूल नियंत्रण पर सख्त कदमों की मांग की।
Ajay Maken

क्या सिर्फ एक छुट्टी दिल्ली की हवा में बड़ा बदलाव ला सकती है? होली के दौरान सामने आए आंकड़े यही संकेत देते हैं। राजधानी में PM2.5 स्तर में 34% की गिरावट दर्ज की गई, और यह गिरावट किसी एक इलाके तक सीमित नहीं रही, बल्कि सभी 17 मॉनिटरिंग स्टेशनों पर कमी दर्ज हुई।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद अजय माकन ने सोशल मीडिया पोस्ट में दिल्ली प्रदूषण का यह तुलनात्मक विश्लेषण साझा किया। उन्होंने बताया कि दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) के 17 स्टेशनों का घंटावार PM2.5 डेटा लेकर दो लगातार 24-घंटे की अवधियों की तुलना की गई।

किन अवधियों की तुलना हुई

माकन के अनुसार पहली अवधि सामान्य दिन की थी: 7AM, 3 मार्च से 7AM, 4 मार्च। दूसरी अवधि होली वाले दिन की थी: 7AM, 4 मार्च से 7AM, 5 मार्च। इसी तुलना से यह निष्कर्ष निकला कि त्योहार के दिन ट्रैफिक कम होने और निर्माण कार्य ठप रहने का सीधा असर वायु गुणवत्ता पर दिखा।

पोस्ट में कहा गया कि शहर का औसत PM2.5 अधिकतम स्तर 134 µg/m³ से घटकर 89 µg/m³ रहा, यानी 34% की कमी। कुछ इलाकों में गिरावट इससे भी ज्यादा रही: आनंद विहार में 50%, अशोक विहार में 48% और मुंडका में 43%।

‘होली पर वाहनों की आवाजाही काफी कम थी और निर्माण कार्य बंद थे, नतीजे चौंकाने वाले हैं।’- अजय माकन

माकन का नीति संबंधी तर्क

अजय माकन ने इस डेटा के आधार पर कहा कि दिल्ली के प्रदूषण में दो ऐसे स्रोत हैं, जिन पर तत्काल कार्रवाई संभव है: वाहन उत्सर्जन और निर्माण धूल। उनका कहना है कि यह बहस सिर्फ मौसमी नहीं रहनी चाहिए, बल्कि रोजमर्रा की शहरी नीति में बदली जानी चाहिए।

उन्होंने सार्वजनिक परिवहन पर बड़े निवेश की बात दोहराई। इसमें मेट्रो विस्तार, इलेक्ट्रिक बसों की संख्या बढ़ाना और लास्ट-माइल कनेक्टिविटी मजबूत करना शामिल है। उनके मुताबिक जब निजी वाहन निर्भरता घटेगी, तभी PM2.5 में स्थायी कमी का असर दिखेगा।

निर्माण धूल और ट्रैफिक पर सुझाए कदम

पोस्ट में निर्माण स्थलों के लिए सख्त धूल नियंत्रण की जरूरत बताई गई है। सुझाए गए उपायों में अनिवार्य पानी का छिड़काव, मलबे को ढककर ले जाना और उल्लंघन पर जुर्माना शामिल है। यह भी कहा गया कि नियम तो हैं, लेकिन उनका कड़ा पालन ही वास्तविक फर्क लाएगा।

इसके साथ कंजेशन प्राइसिंग और नॉन-मोटराइज्ड ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर जैसे कदमों की भी वकालत की गई। तर्क यह है कि सड़क उपयोग की कीमत और वैकल्पिक गतिशीलता ढांचे को साथ लेकर ही ट्रैफिक-जनित प्रदूषण पर दबाव डाला जा सकता है।

‘एक छुट्टी ने साबित कर दिया कि क्या संभव है। अब ऐसी नीति चाहिए जो यह हर दिन करे।’- अजय माकन

दिल्ली की वायु गुणवत्ता पर लंबे समय से बहस होती रही है, लेकिन इस बार प्रस्तुत तुलना का जोर व्यवहारिक हस्तक्षेपों पर है। संदेश साफ है: अगर वाहन और निर्माण धूल पर प्रशासनिक इच्छाशक्ति के साथ लगातार कार्रवाई हो, तो राजधानी की हवा में मापनीय सुधार संभव है।

Shyam Dwivedi
लेखक के बारे में
Shyam Dwivedi

7 वर्षों का पत्रकारिता अनुभव.

पत्रकार वह व्यक्ति होता है जो समाचार, घटनाओं, और मुद्दों की जानकारी देता है, उनकी जांच करता है, और उन्हें विभिन्न माध्यमों जैसे अखबार, टीवी, रेडियो, या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर प्रस्तुत करता है। मेरा नाम श्याम बिहारी द्विवेदी है और मैं पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है। View all posts by Shyam Dwivedi →
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