
All India Speakers Conference
दिल्ली विधानसभा से आज एक ऐतिहासिक पहल की शुरुआत हुई। देश की सभी विधानसभाओं और विधान परिषदों के अध्यक्षों, उपाध्यक्षों और सभापतियों को एक मंच पर लाकर ‘ऑल इंडिया स्पीकर्स कॉन्फ्रेंस’ का आयोजन किया गया। इस महत्वपूर्ण सम्मेलन का उद्घाटन माननीय केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह जी की प्रेरणादायक उपस्थिति में हुआ। यह सम्मेलन लोकतांत्रिक परंपराओं को सशक्त करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
विट्ठलभाई पटेल की स्मृति में सम्मेलन
यह विशेष सम्मेलन श्रद्धेय विट्ठलभाई पटेल जी के सम्मान में आयोजित किया गया है, जो केंद्रीय विधानसभा के पहले भारतीय निर्वाचित स्पीकर बने थे। उनके स्पीकर बनने की 100वीं वर्षगांठ पर यह संगोष्ठी रखी गई। विट्ठलभाई पटेल जी ने अंग्रेजी शासन काल में भी संसदीय परंपराओं, निष्पक्षता और लोकतांत्रिक मूल्यों को जीवित रखा।
सम्मेलन में यह संदेश दिया गया कि आज हम सभी को उनकी दिखाए रास्ते पर चलते हुए लोकतंत्र की इस रोशनी को और आगे बढ़ाना है।
माननीय केंद्रीय गृह मंत्री श्री @AmitShah जी की प्रेरणादायी उपस्थिति में आज दिल्ली विधानसभा से ‘ऑल इंडिया स्पीकर्स कॉन्फ्रेंस’ का शुभारम्भ हुआ है।
देशभर की विधानसभाओं एवं विधान परिषदों के अध्यक्षों, उपाध्यक्षों और सभापतियों का हार्दिक अभिनंदन।
यह ऐतिहासिक सम्मेलन श्रद्धेय… pic.twitter.com/guiO23SNhy
— Rekha Gupta (@gupta_rekha) August 24, 2025
अमित शाह का मार्गदर्शन – सम्मेलन की विशेषता
सम्मेलन में गृह मंत्री श्री अमित शाह जी की मौजूदगी ने पूरे आयोजन को एक विशेष गरिमा दी। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि भारत का लोकतंत्र दुनिया का सबसे बड़ा और मजबूत लोकतंत्र है, और इसे सशक्त बनाना हम सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि लोकतांत्रिक संस्थानों की मर्यादा, कार्य की निष्पक्षता और समयबद्धता को बनाए रखना आज की सबसे बड़ी जरूरत है। उनका दूरदर्शी नेतृत्व सभी प्रतिनिधियों के लिए प्रेरणा बना।
संसद और विधानसभाओं के बीच समन्वय की जरूरत
सम्मेलन का उद्देश्य केवल भाषण तक सीमित नहीं था, बल्कि इसमें भारत के लोकतांत्रिक संस्थानों को बेहतर समन्वय, साझा अनुभवों और प्रशासनिक कार्यशैली में सुधार की दिशा में मार्गदर्शन दिया गया। सभी राज्यों की विधानसभाओं और परिषदों के प्रतिनिधियों ने अपने विचार साझा किए, और यह तय किया गया कि आगे भी इस तरह की बैठकों के माध्यम से लोकतांत्रिक विकास को गति दी जाएगी।
लोकतंत्र को और मजबूत बनाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम
यह सम्मेलन भारत के लोकतंत्र की उस यात्रा का हिस्सा है जो निरंतर सशक्त, पारदर्शी और जवाबदेह शासन की ओर बढ़ रही है। इस आयोजन को लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए एक मील का पत्थर कहा जा सकता है। वक्ताओं ने कहा कि इस तरह के आयोजनों से विधानसभा अध्यक्षों और स्पीकर्स को नए दृष्टिकोण और मार्गदर्शन मिलता है, जिससे वे अपने-अपने राज्यों में और बेहतर ढंग से कार्य कर सकते हैं।
