संसद के मानसून सत्र में तय हुआ चर्चा का टाइम: ऑपरेशन सिंदूर पर 25 घंटे, IT बिल पर 12 घंटे

इस बैठक में संसद की रणनीति और प्रमुख विधेयकों की प्राथमिकता पर चर्चा की गई। यह स्पष्ट है कि सरकार इस सत्र को नीतिगत निर्णयों और संसद में उत्पादकता की दिशा में ले जाना चाहती है।
पार्लियामेंट में पीएम मोदी और अन्य

पार्लियामेंट में पीएम मोदी और अन्य

संसद का मानसून सत्र सोमवार से आरंभ हो गया, लेकिन पहले दिन ही सदन के दोनों सदनों में हंगामे का माहौल रहा। विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच तीखी टकराहट के कारण लोकसभा और राज्यसभा दोनों की कार्यवाहियों को कई बार स्थगित करना पड़ा। इस राजनीतिक शोरगुल के बीच संसद में महत्वपूर्ण चर्चाओं के लिए समय निर्धारित कर दिया गया है।

सबसे अहम है ऑपरेशन सिंदूर, जिस पर कुल 25 घंटे की चर्चा होगी। इसके अलावा इनकम टैक्स बिल, पोस्ट बिल, स्पोर्ट्स बिल, मणिपुर बजट समेत कई विधेयकों पर भी समय बांटा गया है।

ऑपरेशन सिंदूर पर कुल 25 घंटे की बहस

सरकार और विपक्ष के बीच जारी खींचतान के बीच एक बात तय हो गई है कि ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा संसद के अगले सप्ताह होगी। लोकसभा में इस पर 16 घंटे और राज्यसभा में 9 घंटे का समय निर्धारित किया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहले ही ऑपरेशन सिंदूर को भारत की सैन्य ताकत का प्रतीक बताते हुए कहा था कि “22 मिनट में आतंकी ठिकाने तबाह कर दिए गए। यह मेड इन इंडिया सैन्य शक्ति की सफलता है।”

IT बिल को 12 घंटे, पोस्ट बिल को 3 घंटे

सरकार की ओर से संसद में जिन प्रमुख विधेयकों पर चर्चा होनी है, उनके लिए भी समय बांटा गया है। इनकम टैक्स बिल 2025 पर 12 घंटे, इंडियन पोस्ट बिल पर 3 घंटे, नेशनल स्पोर्ट्स बिल पर 8 घंटे, मणिपुर बजट पर 2 घंटे का समय तय किया गया है। इसके अलावा तेलुगु देशम पार्टी (TDP) ने आपातकाल के 50 साल पूरे होने पर विशेष चर्चा की मांग की है, जबकि बीजेपी नेता अनुराग ठाकुर ने हिमाचल प्रदेश में बाढ़ और बारिश को लेकर संसद में चर्चा की आवश्यकता जताई है।

सत्र के लिए तय की रणनीति

सत्र की शुरुआत से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। इसमें गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान समेत कई केंद्रीय मंत्री मौजूद थे।

इस बैठक में संसद की रणनीति और प्रमुख विधेयकों की प्राथमिकता पर चर्चा की गई। यह स्पष्ट है कि सरकार इस सत्र को नीतिगत निर्णयों और संसद में उत्पादकता की दिशा में ले जाना चाहती है।

संसद में पहले दिन भारी हंगामा

हालांकि, सत्र की शुरुआत बेहद हंगामेदार रही। पहले दिन लोकसभा की कार्यवाही तीन बार स्थगित करनी पड़ी। राज्यसभा में भी विपक्षी सांसदों के विरोध के कारण कार्यवाही प्रभावित हुई। विपक्ष ऑपरेशन सिंदूर, डोनाल्ड ट्रंप के मध्यस्थता दावे, राष्ट्रीय सुरक्षा, मणिपुर हिंसा, और महंगाई जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति में है।

वहीं कांग्रेस ने यह आरोप लगाया कि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को बोलने नहीं दिया गया, जिस पर प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी। संसद के मानसून सत्र की शुरुआत जितनी जोरदार रही, उतना ही संभावनाओं और टकराव का संकेत भी लेकर आई है।

चर्चा के लिए समय निर्धारित कर दिया गया है लेकिन इस समय का वास्तव में उपयोग हो, यह सत्ता और विपक्ष की साझा जिम्मेदारी होगी। जहां एक ओर सरकार अपने कार्यक्रमों को लागू करने की ओर बढ़ रही है, वहीं विपक्ष अपनी आवाज बुलंद करने के लिए मंच की मांग कर रहा है।

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