चौथी सीट जीत सकते थे, लेकिन अधूरे वादों के कारण ऐसा नहीं हुआ; फारूक अब्दुल्ला का किस ओर इशारा

फारूक अब्दुल्ला ने चौथी राज्यसभा सीट भाजपा के हाथों गंवाने पर निराशा जताई। उन्होंने इसका कारण "कुछ अधूरे वादे" बताया और कहा कि यह चुनावी प्रक्रिया का हिस्सा है।
चौथी सीट जीत सकते थे, लेकिन अधूरे वादों के कारण ऐसा नहीं हुआ; फारूक अब्दुल्ला का किस ओर इशारा

जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने शनिवार को पार्टी की एकजुटता और कांग्रेस सहित अन्य सहयोगी दलों के समर्थन की सराहना की, जिसके चलते उनकी पार्टी ने जम्मू-कश्मीर से तीन राज्यसभा सीटें हासिल कीं। उन्होंने पार्टी के विधायकों की एकता और सहयोगी दलों के समर्थन के लिए आभार व्यक्त किया।

हालांकि, फारूक अब्दुल्ला ने चौथी राज्यसभा सीट भाजपा के हाथों गंवाने पर निराशा जताई। उन्होंने इसका कारण “कुछ अधूरे वादे” बताया और कहा कि यह चुनावी प्रक्रिया का हिस्सा है। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा, “मैं आभारी हूं कि हमारे सभी विधायक एकजुट रहे और हमारी पार्टी को सफलता मिली। कांग्रेस सहित अन्य दलों ने हमारा समर्थन किया। हम चौथी सीट भी जीत सकते थे, लेकिन कुछ अधूरे वादों के कारण ऐसा नहीं हुआ। इससे निराशा हुई, लेकिन चुनावों में ऐसा होता रहता है।”

चुनाव न लड़ने का किया था अनुरोध

अब्दुल्ला ने यह भी खुलासा किया कि भाजपा ने उनसे चुनाव न लड़ने का अनुरोध किया था, जिसे उनकी पार्टी ने ठुकरा दिया। उन्होंने कहा, “भाजपा ने हमसे संपर्क कर चुनाव न लड़ने को कहा, लेकिन हमने उनके प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया।” उनकी इस टिप्पणी से जम्मू-कश्मीर में सियासी गतिशीलता की स्थिति स्पष्ट होती है।

इन उम्मीदवारों की विजय

शुक्रवार को जम्मू-कश्मीर से चार राज्यसभा सीटों के लिए हुए चुनाव में जेकेएनसी के चौधरी मोहम्मद रमजान, सजाद किचलू और शम्मी ओबेरॉय, साथ ही जम्मू-कश्मीर भाजपा अध्यक्ष सत पाल शर्मा विजयी रहे। ये चारों सीटें फरवरी 2021 से खाली थीं, जब गुलाम नबी आजाद, मीर मोहम्मद फैयाज, शमशेर सिंह और नजीर अहमद लावे का कार्यकाल समाप्त हुआ था।

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