भारत के पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने अपने पद से इस्तीफा देने के बाद पहली बार सार्वजनिक रूप से बयान दिया है। उन्होंने अपने अचानक पद छोड़ने को लेकर चल रही अटकलों पर विराम लगाते हुए कहा कि उन्होंने यह फैसला बीमारी की वजह से नहीं लिया था। 21 जुलाई 2025 को उनके इस्तीफे ने सभी को चौंका दिया था, क्योंकि उनका कार्यकाल 2027 तक निर्धारित था।
अपने इस्तीफे के बाद पहली बार इस मुद्दे पर बोलते हुए धनखड़ ने स्पष्ट किया, ‘मैंने स्वास्थ्य के प्रति कभी लापरवाही नहीं बरती। मैंने जब कहा कि मैं पद त्याग रहा हूं, तो मैंने कभी यह नहीं कहा कि मैं बीमार हूं।’ उन्होंने आगे कहा, ‘मैंने कहा कि मैं स्वास्थ्य को अहमियत दे रहा हूं, जो देनी चाहिए। अपने शास्त्रों में लिखा हुआ है।’
जुलाई 2025 में अचानक इस्तीफे से मचा था हड़कंप
जगदीप धनखड़ ने 21 जुलाई 2025 को स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को अपना त्यागपत्र सौंपा था। मानसून सत्र शुरू होने से ठीक एक दिन पहले लिए गए इस फैसले ने राजनीतिक हलकों में खलबली मचा दी थी। विपक्षी दलों ने इस पर कई सवाल उठाए थे और दावा किया था कि मामला केवल स्वास्थ्य का नहीं, बल्कि कुछ और है।
उनके इस्तीफे को लेकर सवाल इसलिए भी उठे क्योंकि पद छोड़ने से महज 12 दिन पहले ही उन्होंने दिल्ली की जेएनयू यूनिवर्सिटी के एक कार्यक्रम में कहा था, ‘मैं सही समय पर रिटायर होऊंगा, 2027 में, अगर भगवान ने चाहा तो!’ इस बयान के कुछ ही दिनों बाद उनके इस्तीफे ने सबको हैरान कर दिया था।
कैसा रहा धनखड़ का सियासी सफर
जगदीप धनखड़ ने अगस्त 2022 में उपराष्ट्रपति का पदभार ग्रहण किया था। वह राजस्थान के झुंझनू जिले के रहने वाले हैं और पेशे से एक वरिष्ठ वकील रहे हैं। उन्होंने राजस्थान हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में वकालत की। अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत कांग्रेस से करने वाले धनखड़ बाद में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में शामिल हो गए। वे चंद्रशेखर सरकार में केंद्रीय मंत्री भी रहे और उपराष्ट्रपति बनने से पहले पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के रूप में अपनी सेवाएं दी थीं।






