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3 फरवरी को गिग वर्कर्स की राष्ट्रव्यापी हड़ताल, जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर सरकार से करेंगे ये मांगें

Written by:Gaurav Sharma
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ऑनलाइन डिलीवरी एप्स और दूसरे प्लेटफॉर्म से जुड़े गिग वर्कर्स ने 3 फरवरी को देशव्यापी हड़ताल का ऐलान किया है। उचित मेहनताना, मनमानी आईडी ब्लॉकिंग और बेहतर नीतियों की मांग को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया जाएगा।
3 फरवरी को गिग वर्कर्स की राष्ट्रव्यापी हड़ताल, जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर सरकार से करेंगे ये मांगें

नई दिल्ली: ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के लिए काम करने वाले हजारों गिग वर्कर्स ने अपनी समस्याओं को लेकर 3 फरवरी को राष्ट्रव्यापी हड़ताल की घोषणा की है। Gig & Platform Service Workers Union (GIPSWU) के बैनर तले ये सभी कर्मचारी दिल्ली के जंतर-मंतर पर दोपहर 1 बजे इकट्ठा होकर विरोध प्रदर्शन करेंगे।

गिग वर्कर्स का आरोप है कि उन्हें काम का उचित माहौल और मेहनताना नहीं मिलता है। साथ ही, कंपनियां मनमाने तरीके से उनकी आईडी ब्लॉक कर देती हैं, जिससे उनकी आजीविका पर संकट आ जाता है। इससे पहले 26 जनवरी को भी हड़ताल की गई थी, लेकिन उनकी समस्याओं का कोई समाधान नहीं निकला।

मनमानी नीतियों और शोषण के आरोप

यूनियन ने आरोप लगाया है कि गिग वर्कर्स को अक्सर अपारदर्शी रेटिंग सिस्टम, अस्थिर आय और नीतियों में एकतरफा बदलावों का सामना करना पड़ता है। GIPSWU के मुताबिक, जब महिला श्रमिक उचित वेतन या काम के माहौल को लेकर चिंता जताती हैं, तो उन्हें कथित तौर पर परेशान किया जाता है और कई बार उनकी आईडी निष्क्रिय कर दी जाती है।

इस हड़ताल में सिर्फ डिलीवरी वर्कर्स ही नहीं, बल्कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए काम करने वाले ब्यूटीशियन, सफाईकर्मी, प्लंबर, इलेक्ट्रीशियन, और कारपेंटर जैसे पेशेवर भी शामिल होंगे।

सरकार से की ये प्रमुख मांगें

यूनियन की राष्ट्रीय अध्यक्ष सीमा सिंह ने कहा कि सरकार से बार-बार संपर्क करने के बावजूद उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया है। उन्होंने अपनी मुख्य मांगों को दोहराया।

“हम एक अलग केंद्रीय कानून के तहत गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को औपचारिक मान्यता देने, मनमाने ढंग से आईडी ब्लॉक करने पर रोक लगाने, पारदर्शी रेटिंग और कार्य आवंटन प्रणाली, उचित आय दरें और मजबूत शिकायत निवारण तंत्र की मांग कर रहे हैं।”- सीमा सिंह, राष्ट्रीय अध्यक्ष, GIPSWU

सीमा सिंह ने कहा कि सरकार उनकी मांगों को अनसुना कर रही है, जिसके चलते उन्हें फिर से हड़ताल और प्रदर्शन का रास्ता अपनाना पड़ रहा है। इस प्रदर्शन का उद्देश्य सरकार और कंपनियों का ध्यान अपनी समस्याओं की ओर खींचना है।