नई दिल्ली: मणिपुर में महीनों से जारी राष्ट्रपति शासन के बाद एक बार फिर लोकप्रिय सरकार के गठन की कवायद तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने राज्य में सरकार बनाने की पहल शुरू कर दी है, जिसकी अवधि अगले सप्ताह समाप्त हो रही है। इसी सिलसिले में मणिपुर से एनडीए के ज्यादातर विधायक दिल्ली पहुंच चुके हैं, जहां मंगलवार को एक अहम बैठक में मुख्यमंत्री के नाम पर फैसला हो सकता है।
राज्य में पिछले साल मैतेई और कुकी समुदायों के बीच महीनों तक चली जातीय हिंसा के कारण हालात बिगड़ गए थे। इसके चलते तत्कालीन मुख्यमंत्री को इस्तीफा देना पड़ा और सरकार गिर गई थी, जिसके बाद राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया था। अब हालात सुधरने के बाद दोबारा सरकार गठन की प्रक्रिया शुरू की गई है।
दिल्ली में विधायकों का जमावड़ा
मणिपुर के करीब 20 विधायक रविवार रात को ही दिल्ली पहुंच गए थे, जबकि बाकी विधायक भाजपा नेतृत्व के निर्देश पर सोमवार को राष्ट्रीय राजधानी पहुंचे। दिल्ली आने वाले प्रमुख नेताओं में पूर्व मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह, विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष सत्यब्रता सिंह और पूर्व मंत्री वाई खेमचंद सिंह शामिल हैं। इनके अलावा भाजपा की प्रदेश अध्यक्ष ए शारदा देवी भी दिल्ली में मौजूद हैं।
संतुलन के लिए मैतेई-कुकी फॉर्मूला?
सूत्रों के मुताबिक, भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व राज्य में स्थायी शांति और राजनीतिक संतुलन बनाने के लिए एक खास फॉर्मूले पर काम कर रहा है। कयास लगाए जा रहे हैं कि दोनों प्रमुख समुदायों, मैतेई और कुकी, के नेताओं को साधा जा सकता है। इसके तहत एक समुदाय के नेता को मुख्यमंत्री और दूसरे समुदाय के नेता को उपमुख्यमंत्री का पद देकर सत्ता में बराबर की भागीदारी सुनिश्चित की जा सकती है।
केंद्रीय नेतृत्व लेगा अंतिम फैसला
सरकार बनाने की पूरी प्रक्रिया भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व की देखरेख में हो रही है। पार्टी ने विधायक दल के नेता के चुनाव के लिए तरुण चुघ को राष्ट्रीय पर्यवेक्षक (National Observer) नियुक्त किया है। भाजपा नेतृत्व अगले कुछ दिनों में यह तय करेगा कि राज्य में सरकार का गठन किया जाए या नहीं। इससे पहले, पिछले कुछ महीनों में केंद्रीय नेतृत्व ने पार्टी के मैतेई और कुकी विधायकों, सहयोगी दलों NPF और NPP और निर्दलीय विधायकों के साथ अलग-अलग बैठकें की हैं ताकि राजनीतिक माहौल का सही आकलन किया जा सके।





