नई दिल्ली: देश के कई राज्यों में लागू धर्मांतरण रोधी कानूनों की संवैधानिकता को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक और याचिका दाखिल की गई है। नेशनल काउंसिल ऑफ चर्चेज इन इंडिया (NCCI) की इस नई जनहित याचिका पर सोमवार को सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार समेत 12 राज्यों को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने सभी से चार हफ्तों के भीतर जवाबी हलफनामा दाखिल करने को कहा है।
जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने NCCI की तरफ से पेश हुईं वरिष्ठ वकील मीनाक्षी अरोड़ा की दलीलों पर संज्ञान लिया। कोर्ट ने इस नई याचिका को पहले से लंबित इसी तरह की अन्य याचिकाओं के साथ जोड़ने का निर्देश दिया है। साथ ही, यह भी तय किया है कि अब इस पूरे मामले की सुनवाई तीन जजों की बेंच एक साथ करेगी।
याचिका में कानूनों के दुरुपयोग का आरोप
NCCI की ओर से वरिष्ठ वकील मीनाक्षी अरोड़ा ने दलील दी कि इन कानूनों का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग हो रहा है, जिससे नागरिकों के मौलिक अधिकारों का हनन हो रहा है। उन्होंने कहा कि कुछ राज्यों के कानून ऐसे हैं जो धर्मांतरण के खिलाफ समूहों को शिकायत करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं, जिसके चलते लगातार मामले दर्ज किए जा रहे हैं।
अरोड़ा ने कोर्ट को बताया कि ओडिशा और राजस्थान जैसे राज्यों ने भी अपने कानून बनाए हैं, जिन्हें पहले की याचिकाओं में चुनौती नहीं दी गई है। उन्होंने इन कानूनों के क्रियान्वयन पर तत्काल रोक लगाने की मांग की।
केंद्र ने कहा- हमारा जवाब तैयार है
केंद्र सरकार की तरफ से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि राज्य के कानूनों को चुनौती देने वाली ऐसी ही याचिकाएं पहले से लंबित हैं। उन्होंने कहा, “हमारा जवाब तैयार है और इसे जल्द ही दाखिल कर दिया जाएगा।” मेहता ने मीनाक्षी अरोड़ा की दलीलों का विरोध करते हुए कहा कि ये कानून सुप्रीम कोर्ट की 5 जजों की बेंच के एक फैसले के दायरे में आते हैं।
इन राज्यों को जारी हुआ नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र के अलावा उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात, हरियाणा, कर्नाटक, झारखंड, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़, अरुणाचल प्रदेश, ओडिशा, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश को नोटिस जारी किया है। बेंच ने निर्देश दिया कि नोटिस की एक कॉपी राज्यों के महाधिवक्ताओं को भी भेजी जाए और सभी प्रतिवादी एक संयुक्त जवाब दाखिल कर सकते हैं। मामले की सुनवाई को सुव्यवस्थित करने के लिए कोर्ट ने पहले ही याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता सृष्टि और राज्यों की ओर से अधिवक्ता रुचिरा को नोडल वकील नियुक्त किया हुआ है।





