पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विवाद जारी है। इस मामले को लेकर सोमवार को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) ने अपने प्रति प्रतिनिधिमंडल के साथ नई दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से मुलाकात की। उन्होंने एसआईआर प्रक्रिया से संबंधित समस्याओं की चर्चा की। चार मुख्य चिताओं को उठाते हुए ज्ञापन भी सौंपा है। सीएम ने इलेक्शन कमीशन पर भी कई गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि, “सीईसी ने उनका अपमान किया है। इसलिए हमने मीटिंग का बहिष्कार कर दिया।”
ममता बनर्जी ने सीईसी पर अहंकारी और झूठा बताया। साथ ही बुरा व्यवहार करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा, “मैं काफी लंबे समय से दिल्ली में राजनीति से जुड़ी हुई हूं। चार बार मंत्री और सात बार एमपी रह चुकी हूं। लेकिन मैं ऐसा अहंकारी और झूठा चुनाव आयुक्त कभी नहीं देखा।”
बंगाल को बनाया जा रहा टारगेट?
मुख्यमंत्री ने ईसी पर बीजेपी का आईटी सेल होने का आरोप लगाया। एसआईआर प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा, “बंगाल को क्यों टारगेट बनाया जा रहा है? चुनाव लोकतंत्र का उत्सव है। लेकिन चुनाव आयोग ने 58 लाख लोगों के नाम काट दिए हैं और उन्हें डिफेंड करने का मौका भी नहीं दिया गया। चुनाव से कुछ महीने पहले बिना किसी प्लानिंग केवल पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में एसआईआर करवाया गया। असम में बीजेपी सरकार है, वहाँ एसआईआर क्यों नहीं हुआ?” उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उदाहरण देते हुए कहा कि पहले बच्चों का जन्म घर में होता था। ऐसे में बहुत सर्टिफिकेट प्रदान करना काफी मुश्किल है।”
चुनाव आयोग को ममता बनर्जी की चेतावनी
सीएम ने दावा किया कि अब तक 150 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जिसमें कई बीएलओ भी शामिल है। उन्होंने बताया कि वे 100 लोगों को अपने साथ लेकर आई हैं, जिन्हें वोटर लिस्ट में मृत घोषित कर दिया गया। लेकिन वे अभी भी जिंदा हैं। उन्होंने कहा, “करीब दो करोड़ लोगों का नाम वोटर लिस्ट से हटाया गया है। मैं ऐसे लाखों लोगों को दिल्ली ला सकती हूं और यहां परेड करवा सकती हूं। यदि ईसी के पास बीजेपी की ताकत है, तो हमारे पास को जनता की ताकत है।”
टीएमसी की मुख्य चिंताएं
ममता सरकार ने ज्ञापन में कहा कि 2002 की मतदाता सूची में शामिल मामूली गड़बड़ी के कारण मनमाने ढंग से सुनवाई के लिए बुलाया जा रहा है। जबकि आयोग ने इसे लेकर आश्वासन दिया था। टीएमसी ने दावा किया कि माइक्रो अब्ज़र्वर बीजेपी के वफादार हैं, उन्हें बंगाल में चुनिंदा रूप से तैनात किया जा रहा है। जबकि उनके पास कोई वैधानिक अधिकार नहीं है। इसके अलावा भाजपा सदस्यों पर मतदाताओं के नाम हटाने के लिए बड़ी संख्या में फॉर्म 7 आवेदन जमा करने की कोशिश का आरोप भी लगाया। तृणमूल कॉंग्रेस ने कहा, “हमें उम्मीद थी कि चुनाव आयोग सहानुभूति के साथ इन इन सवालों का जवाब लिख देगा। और तत्काल सुधारात्मक कदम उठाएगा। लेकिन अपनी असफलताओं को स्वीकार करने के बजाय आयोग ने प्रतिनिधिमंडल को डराने धमकाना की कोशिश की।”
Led by Smt. @MamataOfficial and Shri @abhishekaitc, our delegation met the Chief Election Commissioner in New Delhi and submitted a detailed memorandum raising four key concerns:
1️⃣ Legitimate voters mapped to the 2002 electoral rolls are being arbitrarily summoned for hearings… pic.twitter.com/z1zjjeOwhE
— All India Trinamool Congress (@AITCofficial) February 2, 2026
Attempts are now being made to communalise the SIR disaster to falsely suggest that only one community has been targeted. Smt. @MamataOfficial has exposed this lie for what it is. A desperate cover-up for a nationwide assault on democracy itself.
This catastrophe has spared no… pic.twitter.com/fNBvjO4yFo
— All India Trinamool Congress (@AITCofficial) February 2, 2026





