कर्मचारियों के लिए अच्छी खबर, जून में बढ़ेगा वेतन! एरियर के साथ खाते में बढ़कर मिलेगी सैलरी

जानकारी के अनुसार, आदर्श चुनाव आचार संहिता के चलते बढ़े हुए वेतन का लाभ मई में नहीं मिल पाएगा। लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद ही जून में एरियर के साथ बढ़े हुए वेतन का भुगतान किया जाएगा, जिसमें अप्रैल और मई की सैलरी शामिल होगी।
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Himachal Employees News : हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के सैहब कर्मचारियों के लिए अच्छी खबर है। नगर निगम द्वारा सफाई व्यवस्था की जिम्मेदारी संभाल रहे सैकड़ों सैहब कर्मचारियों के वेतन में इस साल भी 10 फीसदी का इजाफा होगा। नई दरें 1 अप्रैल 2024 से लागू होंगी, ऐसे में चुनावी आचार संहिता के चलते मई की बजाय जून वेतन में इजाफा होगा। इसके साथ ही कर्मचारियों को एरियर का भी भुगतान किया जाएगा।

अप्रैल से वेतन बढ़ेगा, जून में एरियर के साथ मिलेगी सैलरी

अमर उजाला की खबर के मुताबिक, शिमला नगर निगम प्रशासन द्वारा हर साल सैहब सोसाइटी के कर्मचारियों का वेतन बढ़ाने के लिए अप्रैल से कूड़ा शुल्क की दरें 10 फीसदी बढ़ाई जाती हैं। इस बार भी यह दरें 1 अप्रैल 2024 से बढ़ाई जा चुकी हैं, लेकिन आदर्श चुनाव आचार संहिता के चलते इसका लाभ मई में नहीं मिल पाएगा। लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद ही जून में एरियर के साथ बढ़े हुए वेतन का भुगतान किया जाएगा, जिसमें अप्रैल और मई की सैलरी शामिल होगी। इसका लाभ 600 से ज्यादा कर्मचारियों, सुपवाइजर, चालक और अन्य कर्मियों को मिलेगा।

बायोमीट्रिक हाजिरी का विरोध, 10 जून के बाद कर सकते है हड़ताल

  • सोमवार को सैहब सोसायटी कर्मचारी यूनियन ने एक बैठक बुलाई थी, जिसमें बायोमीट्रिक से हाजिरी लगाने का विरोध कियाा गया और इस फैसले को प्रशासन से बदलने की मांग रखी गई।
  • तय किया गया कि सफाई व्यवस्था का जिम्मा संभाल रहे सैहब सोसायटी के सैकड़ों कर्मचारी अब नगर निगम की ओर से पहाड़ियों और नालों की सफाई के लिए चलाए जाने वाले सफाई अभियानों का बहिष्कार करने का फैसला लिया है।
  • बैठक में तय किया गया कि अगर अभियानों में कर्मियों को बुलाया जाता है तो इसके बदले निगम उन्हें अतिरिक्त राशि प्रदान की जाए।
  • इसके अलावा कर्मचारियों ने निगम प्रशासन को सौंपे 32 सूत्रीय मांगपत्र पर भी फैसला न आने पर निराशा जताते हुए कहा कि निगम इन मांगों पर तुरंत फैसला ले, अन्यथा 10 जून के बाद कर्मचारी हड़ताल पर जाने का फैसला भी ले सकते हैं।
Pooja Khodani
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12 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया में.

खबर वह होती है जिसे कोई दबाना चाहता है। बाकी सब विज्ञापन है। मकसद तय करना दम की बात है। मायने यह रखता है कि हम क्या छापते हैं और क्या नहीं छापते। (पत्रकारिता में 12 वर्षों से सक्रिय, इलेक्ट्रानिक से लेकर डिजिटल मीडिया तक का अनुभव, सीखने की लालसा के साथ हर खबर पर पैनी नजर) View all posts by Pooja Khodani →
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