सरकार का आदेश ‘गैर-जरूरी सामानों की डिलिवरी नहीं कर पाएंगी ई-कॉमर्स कंपनियां’

सरकार का आदेश  ‘गैर-जरूरी सामानों की डिलिवरी नहीं कर पाएंगी ई-कॉमर्स कंपनियां’

E-commerce. Shopping cart with cardboard boxes on laptop. 3d

कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में तीन मई तक के लिए लॉकडाउन बढ़ा दिया है| जिसके बाद सरकार ने जरूरी सामानों की आपूर्ति को सुनिश्चित किए जाने की बात कही थी| जिसमें ई-कॉमर्स कंपनियों को कार्य करने की अनुमति दी है। हालांकि सरकार ने राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए जारी किए नए आदेश में साफ कर दिया है कि ई-कॉमर्स कंपनियां और उनके वाहनों का इस्तेमाल केवल जरूरी सामान की डिलिवरी के लिए होगा। इस दौरान किसी भी गैर-जरूरी सामान की डिलिवरी पर प्रतिबंध जारी रहेगा।

लॉकडाउन में राशन, सब्जी और मेडिकल की दुकानें खुली हैं तो वहीं दूसरी तरफ जरूरी सामानों की होम डिलीवरी भी की जा रही है| नए आदेश में साफ किया गया है ई-कॉमर्स कंपनियां और उनके वाहनों का इस्तेमाल केवल जरूरी सामान की डिलिवरी के लिए होगा। इस दौरान किसी भी गैर-जरूरी सामान की डिलिवरी पर प्रतिबंध जारी रहेगा। चार दिन पहले ई-कॉमर्स कंपनियों को मोबाइल फोन, रेफ्रिजरेटर और सिलेसिलाए परिधानों आदि की बिक्री की अनुमति दी गई थी, लेकिन अब इस छूट को वापस ले लिया गया है।

इससे पहले 3 मई तक ‘लॉकडाउन’ बढ़ाए जाने के दौरान क्या-क्या हो सकेगा, इसको लेकर कहा गया था कि मोबाइल फोन, टीवी, लैपटॉप जैसे इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद ई-कॉमर्स कंपनियों के मंच पर 20 अप्रैल से उपलब्ध होंगे। हालांकि इन सामानों की डिलिवरी करने वाले वाहनों को सड़कों पर चलाने के बारे में संबंधित प्राधिकरण से मंजूरी लेनी होगी। लेकिन अब गाइडलाइन्स में फिर बदलाव किया गया है।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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