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गुजरात में माता-पिता को जानकारी दिए बिना नहीं कर पाएंगे शादी, राज्य सरकार ने रखा मैरिज एक्ट में संशोधन का प्रस्ताव

Written by:Shruty Kushwaha
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अब यहां प्रेम विवाह या परिवार की जानकारी के बिना शादी करना आसान नहीं होने वाला है। राज्य सरकार ने मैरिज रजिस्ट्रेशन एक्ट में संशोधन का प्रस्ताव लाकर विवाह पंजीकरण को पूरी तरह पारदर्शी और अभिभावकों को पूर्व सूचना से जुड़ी अनिवार्य प्रक्रिया बनाने की तैयारी की है। नए प्रावधानों के तहत जोड़े को यह बताना होगा कि उन्होंने माता-पिता को शादी की जानकारी दी है या नहीं, साथ ही अभिभावकों के पहचान और संपर्क संबंधी दस्तावेज भी जमा करने होंगे।
गुजरात में माता-पिता को जानकारी दिए बिना नहीं कर पाएंगे शादी, राज्य सरकार ने रखा मैरिज एक्ट में संशोधन का प्रस्ताव

Gujarat Marriage Registration Act Amendment

गुजरात में अब माता-पिता को बताए बिना शादी करना मुश्किल होने वाला है। राज्य सरकार ने विधानसभा में गुजरात मैरिज रजिस्ट्रेशन एक्ट के नियम 44 में संशोधन का प्रस्ताव पेश किया है, जिसके तहत विवाह पंजीकरण से पहले माता-पिता को सूचना देना अनिवार्य किया जाएगा। सरकार का कहना है कि यह कदम जनहित में उठाया जा रहा है और इससे विवाह प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाया जा सकेगा।

उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने इस प्रस्ताव की जानकारी देते हुए बताया कि विवाह पंजीकरण प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने, बेटियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और फर्जी पहचान या धोखाधड़ी जैसे मामलों पर रोक लगाने के उद्देश्य से ये बदलाव प्रस्तावित किए गए हैं।

गुजरात सरकार लेकर आई रजिस्ट्रेशन ऑफ मैरिज एक्ट में संशोधन प्रस्ताव

गुजरात रजिस्ट्रेशन ऑफ मैरिज एक्ट में संशोधन प्रस्ताव के अनुसार, शादी दर्ज कराने के लिए आवेदन करते समय दूल्हा-दुल्हन को एक औपचारिक घोषणा देनी होगी जिसमें यह स्पष्ट करना होगा कि उन्होंने अपने माता-पिता को विवाह की जानकारी दी है या नहीं। इसके साथ ही माता और पिता दोनों के आधार कार्ड, स्थायी पते और मोबाइल नंबर की जानकारी भी जमा करनी होगी। संबंधित असिस्टेंट रजिस्ट्रार इन सभी दस्तावेजों की जांच करेगा और प्रक्रिया पूरी होने के बाद 10 कार्यदिवस के भीतर माता-पिता को इलेक्ट्रॉनिक या भौतिक माध्यम से इसकी आधिकारिक सूचना भेजी जाएगी।

जनता से मांगी राय

सरकार ने प्रस्तावित संशोधन पर आम जनता से सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित की हैं। इसके लिए 30 दिन की अवधि तय की गई है। आपत्तियों और सुझावों पर विचार करने के बाद ही इन नियमों को अंतिम रूप दिया जाएगा। प्रस्तावित बदलावों के तहत विवाह रजिस्ट्रेशन की पूरी प्रक्रिया को कागजी रिकॉर्ड से हटाकर राज्य सरकार के केंद्रीकृत ऑनलाइन पोर्टल पर स्थानांतरित किया जाएगा। साथ ही आवेदन की तारीख से तीस दिन की अनिवार्य प्रतीक्षा अवधि भी लागू की जाएगी। इस वेटिंग पीरियड के बाद ही विवाह पंजीकरण प्रमाणपत्र जारी किया जाएगा। अगर ये प्रस्ताव स्वीकृत होता है तो इसका सबसे अधिक प्रभाव उन जोड़ों पर पड़ सकता है, जो परिवार की जानकारी के बिना विवाह करना चाहते हैं।

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Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha
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