गुरु पूर्णिमा: श्रद्धा, भक्ति और गुरु के प्रति आभार व्यक्त करने का दिन, जानिए शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरु पूर्णिमा की शुभकामनाएं दी हैं। हमारे यहां गुरु की भूमिका सिर्फ शैक्षणिक नहीं बल्कि आध्यात्मिक, नैतिक और सामाजिक विकास में भी बहुत अहम है। आज के डिजिटल युग में भी गुरु की भूमिका बदली नहीं है। चाहे वह स्कूल के शिक्षक हों, जीवन के मार्गदर्शक हों या माता-पिता..हर वह व्यक्ति गुरु है जो हमें अज्ञान से ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाए।
Guru Purnima

आज देशभर में गुरु पूर्णिमा का पर्व उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है। भारतीय संस्कृति में गुरु को भगवान से भी ऊंचा स्थान दिया गया है और आज के दिन देशभर के मंदिरों, आश्रमों और शिक्षण संस्थानों में विशेष आयोजन होते। यह पर्व आषाढ़ मास की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है, जिसे व्यास पूर्णिमा या आषाढ़ी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है।

गुरु पूर्णिमा के अवसर पर सीएम डॉ. मोहन यादव ने शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा है ‘गुरु पूर्णिमा पर्व की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। श्रद्धेय गुरु ही जीवन को सार्थक बनाने वाले साक्षात ईश्वर हैं। आपके चरणों में प्रणाम करते हुए प्रदेशवासियों की सुख, समृद्धि की कामना करता हूं।’

गुरु पूर्णिमा का महत्व

गुरु पूर्णिमा भारतीय संस्कृति का एक महत्वपूर्ण पर्व है जो गुरु-शिष्य परंपरा और ज्ञान के सम्मान का प्रतीक है। गुरु पूर्णिमा गुरुओं के प्रति कृतज्ञता और सम्मान व्यक्त करने का अवसर है। इस दिन को व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है क्योंकि इस दिन महर्षि वेद व्यास का जन्म हुआ था। उन्होंने वेदों का संकलन, महाभारत, श्रीमद्भागवत और अठारह पुराणों की रचना की जिसके कारण उन्हें प्रथम गुरु माना जाता है। गुरु पूर्णिमा सिर्फ हर उस व्यक्ति के प्रति आभार व्यक्त करने का दिन है जिनसे हमने जीवन में कुछ सीखा है। यह माता-पिता, शिक्षकों सहित जीवन में सही दिशा दिखाने वाले किसी भी व्यक्ति के प्रति सम्मान प्रकट करने का अवसर है।

शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

ज्योतिष पंचांग के अनुसार, इस वर्ष गुरु पूर्णिमा की पूजा के लिए शुभ मुहूर्त 10 जुलाई को प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त (लगभग 4 बजे) से शुरू होकर दिनभर रहेगा। पूजा विधि के लिए सुबह जल्दी उठकर पवित्र नदी में या गंगाजल से स्नान करें। इसके बाद स्वच्छ वस्त्र धारण कर अपने गुरु और भगवान विष्णु, मां लक्ष्मी के साथ महर्षि वेद व्यास की मूर्ति या तस्वीर सजाएं। इन्हें पवित्र जल, फूल, मिठाई और फल अर्पित करें। गुरु मंत्र “गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुर्गुरुर्देवो महेश्वरः” का जाप करें। इस दिन दान करने का विशेष महत्व है। धन, अन्न या वस्त्र का दान करने से सुख-समृद्धि प्राप्त होती है।

Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
Shruty Kushwaha

पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J.), 2001. 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल और लाइव इंडिया मुंबई में कार्य.

2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha →
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