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H1B वीजा की फीस बढ़ने से क्या पड़ेगा असर? क्या भारत के लिए चिंता का है विषय? जानिए

Written by:Rishabh Namdev
Published:
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा फैसला लेते हुए अमेरिकी H1B वीजा की फीस को बढ़ाकर अब एक लाख अमेरिकी डॉलर कर दिया है। यानी भारतीय रुपए में अब यह 88 लाख रुपए हो गई है। इससे भारत पर क्या असर पड़ेगा, चलिए इस खबर में हम आपको बताते हैं।
H1B वीजा की फीस बढ़ने से क्या पड़ेगा असर? क्या भारत के लिए चिंता का है विषय? जानिए

अब H1B वीजा लेने के लिए फीस 1 लाख अमेरिकी डॉलर हो गई है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसका ऐलान किया। भारतीय रुपए में यह 88 लाख रुपए हो चुकी है। डोनाल्ड ट्रंप के इस निर्णय के बाद मौजूदा वीजा होल्डर्स समेत H1B कर्मचारियों को भी रविवार यानी आज से अमेरिका में एंट्री लेने से रोक दिया जाएगा। अब इन कर्मचारियों के लिए कंपनियों को एक लाख अमेरिकी डॉलर की सालाना फीस का भुगतान करना पड़ेगा।

अमेरिका के इस फैसले से भारत पर भी बड़ा असर पड़ेगा। भारत के लिए यह एक गोल्डन चांस हो सकता है। रिपोर्ट्स की मानें तो भारत में नौकरियां बढ़ेंगी। दरअसल, अमेरिका में काम करने वाली कई बड़ी कंपनियों को इससे नुकसान हो सकता है, लेकिन यह फैसला भारत के लिए बेहद शानदार हो सकता है।

जानिए इससे क्या पड़ेगा असर?

दरअसल, जिन कंपनियों को अमेरिका में नुकसान हो सकता है, अब वे भारत में ज्यादा से ज्यादा लोगों को नौकरी देने की कोशिश कर सकती हैं, जिससे भारत में नौकरी के मौके बनेंगे। इकोनॉमिक टाइम्स के मुताबिक, अमेरिका में इन कंपनियों को नुकसान होने के कारण ये कंपनियां दो तरह से नौकरी प्रदान कर सकती हैं। पहला, भारतीय आईटी कंपनियों को ज्यादा से ज्यादा काम देकर, जो दूसरों के लिए काम करती हैं। दूसरा, भारत में अपने खुद के ऑफिस खोलकर भारत के लोगों को नौकरी प्रदान करके। सबसे ज्यादा नुकसान अमेरिका को होगा क्योंकि H1B वीजा की फीस बढ़ने से अब अमेरिका में स्किल्ड एम्प्लॉय को हायर करना बेहद महंगा हो गया है। इस फैसले से कंपनियों का बोझ बढ़ेगा और मुनाफा भी कम होगा।

क्या भारत को उठाना पड़ेगा नुकसान?

इसके अलावा भारत को थोड़ा नुकसान भी उठाना पड़ सकता है। EIIR Trend कंसल्टेंसी फर्म के सीईओ पारेख जैन के मुताबिक, अमेरिका ने जो H1B वीजा की फीस बढ़ाने का निर्णय किया है, उससे भारतीय कंपनियों को नुकसान होगा। भारतीय आईटी कंपनियों में हर प्रोजेक्ट में कुछ लोगों को अमेरिका जाकर काम करना होता है, जबकि कुछ लोग भारत से ही प्रोजेक्ट्स पर काम करते हैं। अब कंपनियां इन प्रोजेक्ट्स पर ज्यादातर काम भारत से ही करने की कोशिश करेंगी। इसके अलावा माइक्रोसॉफ्ट और अन्य अमेरिकी टेक्नोलॉजी कंपनियों द्वारा भारत में स्थित GCC पर ज्यादा भरोसा किया जाएगा।