नई दिल्ली: स्वदेशी लड़ाकू विमान एलसीए तेजस के दुर्घटनाग्रस्त होने की खबरों पर निर्माता कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने एक विस्तृत स्पष्टीकरण जारी किया है। HAL ने इन दावों को पूरी तरह से खारिज करते हुए कहा कि तेजस विमान का कोई क्रैश नहीं हुआ है, बल्कि यह जमीन पर हुई एक मामूली तकनीकी समस्या थी।
कंपनी ने अपने बयान में कहा कि तेजस का सुरक्षा रिकॉर्ड दुनिया के आधुनिक लड़ाकू विमानों में सबसे बेहतरीन है। जिस घटना का जिक्र किया जा रहा है, उसकी मानक प्रक्रियाओं के तहत गहराई से जांच की जा रही है। HAL ने यह भी कहा कि वह भारतीय वायुसेना (IAF) के साथ मिलकर इस समस्या का जल्द से जल्द समाधान निकालने के लिए काम कर रहा है। कंपनी ने मीडिया से तथ्यों की पुष्टि किए बिना गलत जानकारी न फैलाने की भी अपील की है।
आखिर क्या थी 7 फरवरी की घटना?
यह पूरा मामला 7 फरवरी को एक फ्रंटलाइन एयरबेस पर हुई एक घटना से जुड़ा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक ट्रेनिंग सॉर्टी से लौट रहा सिंगल-सीट तेजस जेट लैंडिंग के दौरान रनवे से आगे निकल गया था। शुरुआती जांच में इसका कारण संदिग्ध ब्रेक फेलियर बताया गया। इस घटना में पायलट पूरी तरह सुरक्षित निकलने में कामयाब रहा था।
इस घटना के बाद, भारतीय वायुसेना ने एक एहतियाती कदम उठाते हुए लगभग 30 सिंगल-सीटर तेजस जेट के पूरे बेड़े को उड़ान भरने से रोक दिया था। इन सभी विमानों की गहन तकनीकी जांच की जा रही है ताकि भविष्य में ऐसी किसी भी घटना को रोका जा सके। यह तेजस से जुड़ा तीसरा हादसा था।
करोड़ों की डील और डिलीवरी में देरी
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब HAL, भारतीय वायुसेना को तेजस मार्क 1A वेरिएंट की सप्लाई करने की कई समय-सीमाओं से चूक चुका है। आपको बता दें कि रक्षा मंत्रालय ने फरवरी 2021 में वायुसेना के लिए 83 तेजस Mk-1A जेट खरीदने के लिए HAL के साथ 48,000 करोड़ रुपये का सौदा किया था।
इसके अलावा, पिछले साल सितंबर में 97 और तेजस MK-1A विमानों की खरीद के लिए 62,370 करोड़ रुपये की एक और बड़ी डील को मंजूरी दी गई थी। जेट की डिलीवरी में देरी का एक मुख्य कारण अमेरिकी कंपनी GE एयरोस्पेस द्वारा इंजन की सप्लाई में हुई देरी को भी माना जा रहा है। फिलहाल, जांच पूरी होने के बाद ही तेजस बेड़े के संचालन पर कोई अंतिम निर्णय लिया जाएगा।






