देश के सीमावर्ती गांवों में विकास की नई गाथा लिखने के उद्देश्य से केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह शुक्रवार को असम से ‘वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम-II’ का आगाज करेंगे। यह कार्यक्रम सीमांत क्षेत्रों को मजबूत करने और वहां के निवासियों को देश के अन्य हिस्सों की तरह सभी सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अमित शाह असम के कछार जिले स्थित नाथनपुर से इस कार्यक्रम का आधिकारिक शुभारंभ करेंगे।
इस कार्यक्रम का मुख्य लक्ष्य सीमा पर बसे गांवों से पलायन को रोकना और उन्हें आत्मनिर्भर तथा समृद्ध आवासीय केंद्रों में बदलना है। सरकार का मानना है कि जब सीमावर्ती गांव जीवंत होंगे, तो इससे सीमा सुरक्षा भी कई गुना मजबूत होगी।
क्या है वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम-II?
वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम एक केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसके दूसरे चरण के लिए वित्त वर्ष 2028-29 तक 6,839 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट निर्धारित किया गया है। इस योजना को देश के 15 राज्यों और दो केंद्रशासित प्रदेशों के सीमावर्ती गांवों में लागू किया जाएगा। इसका उद्देश्य इन ‘भारत के पहले गांवों’ में बुनियादी ढांचे का विकास, आजीविका के अवसर पैदा करना और उन्हें सभी आधुनिक सुविधाओं से जोड़ना है।
मोदी जी के विजन को साकार करने वाला कार्यक्रम
शुभारंभ से पहले गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के माध्यम से इस कार्यक्रम के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन को साकार करता है।
“शुक्रवार को असम में वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम-II का शुभारंभ होगा। यह कार्यक्रम भारत के पहले गांवों के विकास के लिए मोदी जी के विजन को साकार किया है।” — अमित शाह, केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री
उन्होंने आगे कहा कि वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम ने सीमावर्ती गांवों में वे सभी सुविधाएं प्रदान कीं, जो देश के अन्य हिस्सों में उपलब्ध हैं। गृह मंत्री के अनुसार, इस पहल ने न केवल सीमावर्ती गांवों से पलायन को प्रभावी ढंग से रोका, बल्कि उन्हें समृद्ध आवासीय केंद्र बनाया और सीमा सुरक्षा को भी मजबूती प्रदान की। वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम का दूसरा चरण इन लाभों को और अधिक गांवों तक पहुंचाएगा, जिससे ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य के अनुरूप सुरक्षित, मजबूत और समृद्ध सीमावर्ती समुदायों को बढ़ावा मिलेगा।






