
श्रीनगर में ऑल पार्टीज हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष मीरवाइज उमर फारूक ने दावा किया है कि उन्हें उनके आवास में नजरबंद कर दिया गया है। उन्होंने अधिकारियों पर उनकी स्वतंत्रता को प्रतिबंधित करने का आरोप लगाया और इसे अनुचित और अलोकतांत्रिक करार दिया। मीरवाइज ने कहा कि उन्हें बिना किसी औपचारिक आदेश या स्पष्टीकरण के घर में रहने के लिए मजबूर किया जा रहा है, जिससे उनकी धार्मिक और सामाजिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं। उन्होंने इस कार्रवाई को कश्मीर में राजनीतिक असहमति को दबाने की कोशिश बताया।
मीरवाइज़ ने अपने बयान में कहा कि वह जम्मू-कश्मीर में शांति और बातचीत की वकालत करते रहे हैं, लेकिन अधिकारियों का यह रवैया उनकी आवाज़ को दबाने का प्रयास है। उन्होंने अपने समर्थकों और आम लोगों से इस मामले में एकजुटता दिखाने की अपील की। मीरवाइज ने यह भी कहा कि वह पहले भी कई बार नजरबंदी का सामना कर चुके हैं, लेकिन इस बार कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया गया है। यह कार्रवाई उनके नेतृत्व वाली जामिया मस्जिद में होने वाली धार्मिक गतिविधियों को भी प्रभावित कर रही है।
आधिकारिक बयान जारी नहीं किया
स्थानीय प्रशासन ने अभी तक मीरवाइज के आरोपों पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। कुछ सूत्रों का कहना है कि यह कदम क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए उठाया गया हो सकता है, लेकिन इसकी कोई पुष्टि नहीं हुई है। मीरवाइज की नजरबंदी की खबर ने कश्मीर घाटी में कई लोगों के बीच नाराजगी पैदा की है, और सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज हो गई है। लोग इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला बता रहे हैं।
मीरवाइज की नजरबंदी की निंदा
हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के अन्य नेताओं ने भी मीरवाइज की नजरबंदी की निंदा की है और इसे कश्मीर में राजनीतिक नेतृत्व को कमजोर करने की साजिश बताया है। मीरवाइज ने अपने समर्थकों से शांति बनाए रखने की अपील की है और साथ ही केंद्र सरकार से इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है। यह घटना एक बार फिर कश्मीर में तनावपूर्ण राजनीतिक माहौल को उजागर करती है, जहां नेताओं की गतिविधियों पर अक्सर पाबंदियां लगाई जाती रही हैं।
