संसद का मानसून सत्र जैसे ही शुरू हुआ, लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में राजनीतिक घमासान देखने को मिला। ऑपरेशन सिंदूर, डोनाल्ड ट्रंप के मध्यस्थता के दावे, और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर विपक्ष ने सरकार से जवाब की मांग की। इसी बीच लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने सत्ता पक्ष पर विपक्ष की आवाज दबाने का गंभीर आरोप लगाया।
राहुल गांधी ने लगाया आरोप
राहुल गांधी ने संसद परिसर में मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि- “मैं नेता प्रतिपक्ष हूं, मेरा संवैधानिक हक है कि मैं बोलूं। लेकिन जब मैं कुछ कहना चाहता हूं, मुझे बोलने नहीं दिया जाता।” उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता पक्ष की रणनीति साफ है, विपक्ष को सदन में बोलने नहीं देना। राहुल ने कहा, “रक्षा मंत्री को तो पूरा बोलने दिया गया, लेकिन जब हम कुछ कहना चाहते हैं तो माइक बंद कर दिया जाता है।” उन्होंने इसे लोकतंत्र के खिलाफ बताते हुए कहा कि अगर संसद में ही नेता प्रतिपक्ष को बोलने का अवसर नहीं मिलेगा, तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंताजनक है।
बोलने से क्यों रोक रहे हैं?
कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी संसद में राहुल गांधी को न बोलने देने पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सवाल उठाया और कहा कि- “अगर सरकार कह रही है कि वो ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा के लिए तैयार है, तो फिर नेता प्रतिपक्ष को बोलने क्यों नहीं दिया जा रहा?” प्रियंका ने कहा कि सरकार केवल अपने पक्ष की बात रखना चाहती है, लेकिन लोकतंत्र एकतरफा संवाद नहीं है। अगर सत्ता पक्ष बात रखेगा, तो विपक्ष को जवाब देने और सवाल उठाने का बराबर का अधिकार होना चाहिए।
हमें भी जगह मिलनी चाहिए
राहुल गांधी ने कहा कि सिर्फ चर्चा की बात करना पर्याप्त नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि- “हम दो शब्द कहना चाहते थे, लेकिन सत्ता पक्ष को यह मंजूर नहीं था। यह एकतरफा अप्रोच है, जो देश के लोकतंत्र के लिए खतरा है।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि चर्चा तभी सार्थक होगी जब विपक्ष को पूरा मौका मिलेगा अपनी बात रखने का। इस मुद्दे पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने संसद में कहा कि सरकार सभी मुद्दों पर चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन नियमों के तहत ही। सत्ता पक्ष की ओर से यह कहा गया कि विपक्ष को बोलने का अवसर मिलेगा, लेकिन प्रक्रिया का पालन आवश्यक है।
वहीं विपक्ष खासतौर पर कांग्रेस ने संकेत दिए कि वे संसद सत्र के दौरान ऑपरेशन सिंदूर, ट्रंप का दावा, किसानों की समस्या, और मणिपुर की स्थिति जैसे मुद्दों पर सरकार को कठघरे में खड़ा करेंगे।
संसद में गरमाया माहौल
संसद के मानसून सत्र की शुरुआत से ही यह स्पष्ट हो गया है कि सत्ता और विपक्ष के बीच टकराव तेज रहेगा। राहुल गांधी का यह बयान कि “नेता प्रतिपक्ष को बोलने नहीं दिया जाता”, एक संवैधानिक बहस को जन्म देता है कि क्या भारतीय लोकतंत्र में विपक्ष की आवाज को पर्याप्त स्थान मिल रहा है? प्रियंका गांधी के सवाल इस बहस को और गहरा करते हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में सत्ता पक्ष इस आरोपों पर क्या रुख अपनाता है और क्या वास्तव में विपक्ष को बराबरी से बोलने का मौका मिलेगा।





