सेना को अमेरिका से मिलेगी अपाचे AH-64E हेलीकॉप्टरों की पहली खेप, पाकिस्तान से लगी सीमा पर होगी तैनाती

रिपोर्ट के मुताबिक, आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान और अमेरिका की ओर से सामना की गई तकनीकी समस्याओं के कारण डिलीवरी में बार-बार देरी हुई, जिसके चलते समयसीमा दिसंबर 2024 तक खिसक गई।
सेना को अमेरिका से मिलेगी अपाचे AH-64E हेलीकॉप्टरों की पहली खेप, पाकिस्तान से लगी सीमा पर होगी तैनाती

भारतीय सेना को आखिरकार अपाचे AH-64E हमलावर हेलीकॉप्टरों का पहला बैच मिलने की उम्मीद है, जो ऑपरेशन सिंदूर के मद्देनजर पश्चिमी सीमा पर उसकी युद्ध क्षमता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। सूत्रों के अनुसार, 22 जुलाई को सेना के एविएशन कोर को पहले तीन हेलीकॉप्टर सौंपे जाएंगे। भारतीय सेना ने 2020 में संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ 6 अपाचे हेलीकॉप्टरों के लिए 600 मिलियन डॉलर का सौदा किया था, जिनकी डिलीवरी शुरू में मई-जून 2024 तक होने की उम्मीद थी।

रिपोर्ट के मुताबिक, आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान और अमेरिका की ओर से सामना की गई तकनीकी समस्याओं के कारण डिलीवरी में बार-बार देरी हुई, जिसके चलते समयसीमा दिसंबर 2024 तक खिसक गई। मूल योजना के अनुसार, छह हेलीकॉप्टर दो बैचों में तीन-तीन के सेट में आने थे। दूसरा बैच इस साल के अंत में अपेक्षित है, लेकिन पहला बैच अभी तक भारत नहीं पहुंचा है, जबकि समयसीमा एक साल पहले ही बीत चुकी है। सेना के एविएशन कोर ने मार्च 2024 में जोधपुर के नगतलाव में अपनी पहली अपाचे स्क्वाड्रन स्थापित की थी, लेकिन हेलीकॉप्टरों के अभाव में यह स्क्वाड्रन अभी तक पूरी तरह कार्यात्मक नहीं हो सका।

पाकिस्तान से लगी सीमा पर तैनाती

यह लंबा इंतजार सेना की परिचालन तत्परता में एक महत्वपूर्ण कमी का कारण बना है, खासकर पश्चिमी मोर्चे पर बदलते खतरे के परिदृश्य के बीच। अपाचे AH-64E हेलीकॉप्टर अपनी फुर्ती, मारक क्षमता और उन्नत लक्ष्यीकरण प्रणालियों के लिए जाने जाते हैं, जो सेना के हथियारों के भंडार में एक महत्वपूर्ण जोड़ हैं। भारतीय वायुसेना ने 2015 के एक अलग समझौते के तहत पहले ही 22 अपाचे हेलीकॉप्टर शामिल किए हैं, लेकिन भारतीय सेना अभी भी अपनी जमीनी हमले की क्षमताओं को बढ़ाने के लिए इन उन्नत हेलीकॉप्टरों का इंतजार कर रही है।

अपाचे AH-64E हेलीकॉप्टर की खासियतें

अपाचे में आधुनिक लेजर और इन्फ्रारेड लक्ष्यीकरण प्रणाली है, जो रात और खराब मौसम में भी सटीक हमले की क्षमता प्रदान करती है।

यह हेलफायर मिसाइलें, रॉकेट, और 30 मिमी ऑटोमैटिक तोप से लैस है, जो बख्तरबंद वाहनों और बंकरों को नष्ट कर सकता है।

इसकी फुर्ती और गति इसे युद्धक्षेत्र में तेजी से स्थान बदलने और चकमा देने में सक्षम बनाती है।

इसमें डिजिटल कॉकपिट और नेविगेशन सिस्टम हैं, जो पायलटों को जटिल परिस्थितियों में बेहतर नियंत्रण प्रदान करते हैं।

रडार और मिसाइल चेतावनी प्रणालियों के साथ यह दुश्मन के हमलों से बचने में सक्षम है।

टोही, जमीनी हमला, और हवाई समर्थन जैसे कई भूमिकाओं में यह प्रभावी है।

यह उच्च ऊंचाई और गर्म जलवायु में भी कुशलता से काम कर सकता है, जो भारत की सीमाओं के लिए उपयुक्त है।

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