नई दिल्ली: देश में डीपफेक और इंटरनेट पर बढ़ते दुष्प्रचार अभियानों को लेकर केंद्र सरकार ने अपना रुख और सख्त कर लिया है। केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने गुरुवार को डिजिटल मंचों को स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि उन्हें अपने प्लेटफॉर्म पर मौजूद कंटेंट की जिम्मेदारी लेनी ही होगी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बच्चों और नागरिकों की ऑनलाइन सुरक्षा सुनिश्चित करना इन प्लेटफॉर्म्स का दायित्व है और ऐसा न करने पर उन्हें जवाबदेह ठहराया जाएगा।
यह बातें उन्होंने राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स एसोसिएशन (डीएनपीए) के एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहीं। वैष्णव ने कहा कि समाज के मूलभूत सिद्धांत आज खतरे में हैं और डीपफेक के शिकार हो रहे लोगों की सुरक्षा करना बेहद आवश्यक है।
प्लेटफॉर्म्स को समझनी होगी अपनी जवाबदेही
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अब समय आ गया है कि प्लेटफॉर्म्स अपनी जिम्मेदारी को समझें और उन संस्थानों में विश्वास को मजबूत करें जिन्हें मानव समाज ने हजारों वर्षों में बनाया है। उन्होंने कहा कि परिवार, न्यायपालिका, मीडिया और विधायिका जैसे सभी संस्थान विश्वास के मूल सिद्धांत पर काम करते हैं, जिसे डीपफेक जैसी तकनीकें कमजोर कर रही हैं।
“मंचों को अपने कंटेंट की जिम्मेदारी लेनी चाहिए। बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा, सभी नागरिकों की ऑनलाइन सुरक्षा मंचों की जिम्मेदारी है।”- अश्विनी वैष्णव, केंद्रीय मंत्री
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इन सिद्धांतों का पालन नहीं किया गया तो ये मंच अपनी जवाबदेही से बच नहीं सकते। वैष्णव ने कहा, “मैं मंचों से अनुरोध करता हूं कि वे इस मानव समाज की मूलभूत आवश्यकताओं में सहयोग करें। आज समाज इस बदलाव की मांग कर रहा है, और इसका सम्मान किया जाना चाहिए।”
AI जनित कंटेंट के लिए रेगुलेशन की जरूरत
अश्विनी वैष्णव ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से बनी सामग्री के उपयोग को रेगुलेट करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि इंटरनेट का स्वरूप अब काफी बदल चुका है। मंत्री के अनुसार, किसी भी व्यक्ति का चेहरा, आवाज या व्यक्तित्व का इस्तेमाल कर AI से कोई सामग्री बनाने से पहले उस व्यक्ति की सहमति लेना अनिवार्य होना चाहिए।
यह चिंताएं हाल ही में संपन्न हुए ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट’ के कुछ दिनों बाद ही सामने आई हैं। उस समिट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन सहित कई वैश्विक नेताओं ने भी नागरिकों को डीपफेक और गलत सूचनाओं के खतरों के बारे में आगाह किया था। मंत्री ने मीडिया का उदाहरण देते हुए कहा कि उसकी विश्वसनीयता निष्पक्षता और प्रकाशन से पहले तथ्यों की पुष्टि पर निर्भर करती है, और यही सिद्धांत डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर भी लागू होना चाहिए।





