जगदीप धनखड़ के बाद कौन बनेगा अगला उपराष्ट्रपति, चर्चा गरम; राजनीतिक गलियारों में कौन से नाम

कांग्रेस और विपक्षी दलों का कहना है कि धनखड़ ने बिना किसी विदाई भाषण या औपचारिकता के पद छोड़ दिया जिससे सवाल उठ रहे हैं।
जगदीप धनखड़ के बाद कौन बनेगा अगला उपराष्ट्रपति, चर्चा गरम; राजनीतिक गलियारों में कौन से नाम

संसद का मॉनसून सत्र शुरू होते ही उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के अचानक इस्तीफे ने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है। इस इस्तीफे ने न केवल सत्ताधारी दल को असमंजस में डाला, बल्कि विपक्ष को भी एकजुट होकर नया उम्मीदवार उतारने की रणनीति बनाने का मौका दे दिया। कांग्रेस सूत्रों का दावा है कि धनखड़ का इस्तीफा सामान्य नहीं था, बल्कि राज्यसभा में विपक्ष की रणनीतिक चालों और दो जजों के खिलाफ महाभियोग प्रस्तावों के दबाव का नतीजा हो सकता है।

कांग्रेस और विपक्षी दलों का कहना है कि धनखड़ ने बिना किसी विदाई भाषण या औपचारिकता के पद छोड़ दिया जिससे सवाल उठ रहे हैं। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने धनखड़ से शिष्टाचारवश बात की। सूत्रों के मुताबिक, विपक्ष को लगता है कि यह इस्तीफा सियासी दबाव का परिणाम है। विपक्ष अब एक साझा उम्मीदवार उतारने की तैयारी में है और इंडिया गठबंधन के बाहर के दलों से भी बातचीत चल रही है। एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने कहा, “यह सिर्फ चुनाव नहीं, बल्कि विचारधारा की लड़ाई है।”

सियासी नाटक को और गहराया

सोमवार को दिनभर चले घटनाक्रम ने इस सियासी नाटक को और गहरा किया। दोपहर 1 बजे राज्यसभा की कार्य सलाहकार समिति की बैठक बेनतीजा रही, जहां विपक्ष ने ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा की मांग की। दोपहर 2:20 बजे कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने 63 विपक्षी सांसदों के हस्ताक्षर वाला दो जजों के खिलाफ महाभियोग नोटिस सभापति कार्यालय में जमा किया। शाम 4:07 बजे धनखड़ ने जस्टिस अरुण वर्मा के खिलाफ महाभियोग नोटिस की पुष्टि की और जस्टिस शेखर यादव के खिलाफ नोटिस के हस्ताक्षरों की जांच की बात कही।

किस तरह की चल रही चर्चा

शाम 7:30 बजे जयराम रमेश ने धनखड़ से फोन पर बात की जिसमें धनखड़ ने निजी और स्वास्थ्य कारणों का हवाला दिया। अब उपराष्ट्रपति का पद खाली होने के साथ ही सियासी अटकलें तेज हैं। अगले उपराष्ट्रपति को लेकर अलग-अलग नाम रखे जा रहे हैं। हालांकि, अभी तक किसी एक नाम पर मुहर नहीं लग पाई है। निर्वाचन आयोग नए उपराष्ट्रपति के चुनाव की तैयारी कर रहा है, जबकि सरकार और विपक्ष के बीच तनातनी बढ़ रही है। यह स्पष्ट है कि मॉनसून सत्र की शुरुआत तूफानी हो चुकी है और यह सियासी जंग अभी खत्म होने वाली नहीं है।

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