
जम्मू-कश्मीर के पूर्व हुर्रियत कॉन्फ्रेंस अध्यक्ष अब्दुल गनी भट का बुधवार को बारामूला जिले के सोपोर स्थित उनके आवास पर निधन हो गया। वह 90 वर्ष के थे। हुर्रियत अध्यक्ष मीरवाइज उमर फारूक ने बताया कि बीते कुछ वर्षों से खराब स्वास्थ्य के कारण भट अपने घर तक ही सीमित थे और बुधवार शाम को उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके पार्थिव शरीर को सोपोर के उनके पैतृक कब्रिस्तान में दफनाया जाएगा।
अब्दुल गनी भट को अलगाववादी नेतृत्व में उदारवादी चेहरा माना जाता था। उन्होंने कश्मीर मुद्दे के समाधान के लिए नई दिल्ली के साथ बातचीत की वकालत की थी। अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार और बाद में मनमोहन सिंह की यूपीए सरकार के दौरान हुर्रियत कॉन्फ्रेंस को केंद्र के साथ वार्ता में शामिल करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। भट ने बंदूक के इस्तेमाल और लंबे समय तक कश्मीर में बंद का विरोध किया था, जिससे वे अन्य नेताओं जैसे सैयद अली शाह गिलानी से अलग थे।
राजनीतिक विचारधारा भट से अलग
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने उनके निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि भले ही उनकी राजनीतिक विचारधारा भट से अलग थी, लेकिन वह उन्हें एक सभ्य व्यक्ति के रूप में याद रखेंगे। पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने भट को एक विद्वान और बुद्धिजीवी बताया, जिन्होंने कश्मीर के लिए शांतिपूर्ण समाधान की वकालत की। मीरवाइज ने इसे व्यक्तिगत क्षति बताते हुए कहा कि कश्मीर ने एक दूरदर्शी नेता खो दिया।
श्रीनगर से फारसी में किया था स्नातक
1935 में सोपोर के बोटेंगू में जन्मे भट ने प्रताप कॉलेज, श्रीनगर से फारसी में स्नातक किया और अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से फारसी में स्नातकोत्तर और कानून की डिग्री हासिल की। उन्होंने 1963 में पूंछ के सरकारी कॉलेज में फारसी के प्रोफेसर के रूप में काम शुरू किया, लेकिन 1986 में सुरक्षा कारणों से उनकी सरकारी नौकरी समाप्त कर दी गई। इसके बाद उन्होंने मुस्लिम यूनाइटेड फ्रंट (एमयूएफ) की स्थापना की और 1993 में हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
