मुंबई पहुंचते ही बोली कंगना, ‘उद्धव ठाकरे! आज मेरा घर टूटा है, कल तेरा घमंड टूटेगा’

मुंबई पहुंचते ही बोली कंगना, ‘उद्धव ठाकरे! आज मेरा घर टूटा है, कल तेरा घमंड टूटेगा’

मुंबई, डेस्क रिपोर्ट| बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत (Kangna Ranaut) और संजय राउत (Sanjay Raut) के बीच चल रहे विवाद के बीच कंगना बुधवार दोपहर 2:45 बजे मुंबई पहुंचीं। इस दौरान एयरपोर्ट पर भारी हंगामा हुआ। उनके समर्थक और विरोधी आमने-सामने आ गए। वे एयरपोर्ट से सीधे खार स्थित अपने घर पहुंचीं।

इधर उनके बीएमसी (BMC) ने बांद्रा वेस्ट के पाली हिल रोड पर स्थित कंगना रनौत के दफ्तर के अवैध निर्माण को ध्वस्त किया| इस कार्रवाई के खिलाफ कंगना ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की है, जिस पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने बीएमसी की कार्रवाई पर रोक लगा दी है। वहीं कंगना ने महाराष्ट्र (Maharashtra) के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे (Udhav Thackeray) को चुनौती दी। उन्होंने कहा कि आज मेरा घर टूटा है, कल तेरा घमंड टूटेगा, जय महाराष्ट्र।

ये वक्त का पहिया है, याद रखना
कंगना ने ट्विटर पर एक वीडियो शेयर करके कहा है, ”उद्धव ठाकरे तुझे क्या लगता है तूने फ़िल्म माफ़िया के साथ मेरा घर तोड़ कर मुझसे बहुत बड़ा बदला लिया है| आज मेरा घर टूटा है कल तेरा घमंड टूटेगा”| “ये वक्त का पहिया है, याद रखना.. हमेशा एक जैसा नहीं रहता और मुझे लगता है कि तुमने मेरे उपर बहुत बड़ा एहसान किया है, क्योंकि मुझे पता तो था ही कि कश्मीरी पंडितों पर क्या बीती होगी, आज मैंने महसूस किया है. आज मैं इस देश को वचन देती हूं कि मैं सिर्फ अयोध्या पर ही नहीं बल्कि कश्मीर पर भी एक फिल्म बनाउंगी और अपने देशवासियों को जगाऊंगी. क्योंकि मुझे पता था कि ये मेरे साथ होगा तो होगा. लेकिन मेरे साथ हुआ है इसका कोई मतलब है, इसके कोई मायने हैं. उद्धव ठाकरे ये जो क्रूरता, ये आतंक है अच्छा हुआ कि ये मेरे साथ हुआ, इसके कुछ मायने हैं. जय हिंद जय महाराष्ट्र”

बुलडोजर पर हाई कोर्ट की रोक
बॉलीवुड एक्ट्रेस कंगना रनौत ने उनके बंगले में ‘अवैध निर्माण’ संबंधी मुंबई नगर निकाय के नोटिस को चुनौती के लिए बुधवार को बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और ढहाए जाने की प्रक्रिया पर रोक लगाए जाने का अनुरोध किया। मामले में संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट ने रनौत के दफ्तर को बीएमसी द्वारा तोड़ने पर रोक लगा दी है।

Gaurav Sharma
लेखक के बारे में
Gaurav Sharma

निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
Follow Us :GoogleNews